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अनुकंपा नौकरी विरासत नहीं, जिम्मेदारी, हाईकोर्ट ने कहा- सास की देखभाल नहीं करने पर बहू की सेवा होगी समाप्त
22-Apr-2026 12:29 PM
अनुकंपा नौकरी विरासत नहीं, जिम्मेदारी, हाईकोर्ट ने कहा- सास की देखभाल नहीं करने पर बहू की सेवा होगी समाप्त

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 22 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर कहा है कि यह कोई निजी उपहार या पैतृक संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने का माध्यम है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यदि लाभार्थी अपने आश्रितों की देखभाल नहीं करता, तो उसकी सेवा समाप्त भी की जा सकती है।

अंबिकापुर निवासी ज्ञानती तिवारी के पति घनश्याम तिवारी पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे, जिनका वर्ष 2001 में निधन हो गया। इसके बाद उनके पुत्र अविनाश तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति मिली। लेकिन दिसंबर 2021 में अविनाश की भी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी पत्नी नेहा तिवारी को इस शर्त पर नौकरी दी कि वह अपनी सास की पूरी देखभाल करेंगी।

याचिकाकर्ता ज्ञानती तिवारी ने अदालत में आरोप लगाया कि नौकरी मिलने के बाद बहू का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उन्होंने दावा किया कि बहू ने न केवल उनके साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन्हें बेसहारा छोड़ दिया, जिससे वे बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रही हैं।

याचिका में 8 मार्च 2022 को जारी नियुक्ति आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही यह आग्रह भी किया गया कि नौकरी उनकी अविवाहित बेटी प्रीति तिवारी को दी जाए, क्योंकि बहू ने अपने दायित्वों का पालन नहीं किया।

अदालत ने कहा कि नियुक्ति के समय बहू ने शपथ पत्र देकर सास की देखभाल का वादा किया था। ऐसे में वह इस जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य पूरे परिवार को सहारा देना है, न कि किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाना।

अदालत ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी अपने आश्रितों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो सरकारी नीति के तहत उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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