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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 22 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के एक न्यायालय कर्मचारी को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर एलएलबी तृतीय वर्ष की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें कर्मचारी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता की नियुक्ति सितंबर 2022 में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में सहायक ग्रेड-3 पद पर तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि के साथ हुई थी। नियुक्ति शर्तों के तहत पहले वर्ष में उच्च शिक्षा के लिए कार्यालय प्रमुख से अनुमति लेना अनिवार्य था। कर्मचारी को एलएलबी के पहले और दूसरे वर्ष की पढ़ाई के लिए अनुमति मिल चुकी थी।
6 अक्टूबर 2023 से लागू छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका कर्मचारी सेवा नियम, 2023 के नियम-11 के तहत कर्मचारियों को नियमित छात्र के रूप में परीक्षा देने पर रोक लगाई गई है। इन नियमों के अनुसार, कर्मचारी केवल प्राइवेट या पत्राचार माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं। इसी आधार पर जब याचिकाकर्ता ने तीसरे वर्ष की परीक्षा नियमित छात्र के रूप में देने की अनुमति मांगी, तो आवेदन खारिज कर दिया गया।
इस फैसले के खिलाफ कर्मचारी ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की। प्रारंभ में एकलपीठ से राहत मिली, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने उस आदेश को निरस्त करते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए याचिकाकर्ता को एलएलबी तृतीय वर्ष की शेष परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी। साथ ही, जिस विषय की परीक्षा में वह पहले वंचित चुका है, उस पर अलग से आदेश जारी करने की बात कही गई है।


