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निरीक्षण करने पहुंची दिल्ली से टीम, कहा- कागजी नहीं, असली तैयारी बताएं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 22 अप्रैल। बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी जूलाजिकल पार्क में सुविधाओं का आकलन करने पहुंची सेंट्रल जू अथॉरिटी की टीम ने तीन दिन तक गहन निरीक्षण कर कई गंभीर खामियां उजागर की हैं। महाराष्ट्र कैडर के आईएफएस अधिकारी एम. कोंडाला राव और केरल के वरिष्ठ पशु चिकित्सक जैकब अलेक्जेंडर की टीम ने प्रबंधन से कहा कि सिर्फ रिपोर्ट नहीं बनाकर दें, यह बताइए कि आपदा या बीमारी फैलने पर जानवरों को बचाने की आपकी ठोस योजना क्या है?
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी प्रशासनिक कमी यह सामने आई कि लंबे समय से जू में नियमित डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं है, जबकि नियमों के अनुसार यह पद अनिवार्य है। टीम ने निर्देश दिए कि भविष्य में कोई भी कार्य शुरू करने से पहले विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर दिल्ली भेजी जाए और मंजूरी मिलने के बाद ही काम किया जाए।
टीम ने पाया कि जू में बार-बार बिजली कटौती होती है, जिससे न केवल प्रबंधन बल्कि जानवर भी प्रभावित होते हैं। पानी की आपूर्ति भी बाधित होती है। अधिकांश बाड़े (एनक्लोजर) जर्जर हालत में हैं और लंबे समय से उनका नवीनीकरण नहीं हुआ है। वहीं, वर्षों से डॉ. पी.के. चंदन अकेले ही वन्यजीवों के इलाज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
पिछले दो वर्षों से जू का वाइल्डलाइफ एक्सचेंज प्रोग्राम पूरी तरह बंद पड़ा है। न नए जानवर आए हैं और न ही यहां से अन्य राज्यों में भेजे गए हैं, जिससे प्रजनन और प्रजाति विस्तार प्रभावित हुआ है।
टीम ने कर्मचारियों से पिंजरों की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता पर फीडबैक लिया, जबकि बैटरी वाहन चालकों से पर्यटकों के अनुभव के बारे में जानकारी जुटाई। साथ ही, पिछले वर्षों में जन्मे और मृत हुए शावकों के रिकॉर्ड भी खंगाले गए।


