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बादाम फेंककर विरोध का असर, हाउसिंग बोर्ड के ईई सहित दो अधिकारी मुख्यालय अटैच, गुमी फाइल भी मिली
21-Apr-2026 12:19 PM
बादाम फेंककर विरोध का असर, हाउसिंग बोर्ड के ईई सहित दो अधिकारी मुख्यालय अटैच, गुमी फाइल भी मिली

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस में हुई थी शिकायत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 21 अप्रैल। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड में संपत्ति म्यूटेशन के एक मामले को लेकर सोशल मीडिया पर 17 अप्रैल 2026 को वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर शुरू हुई जांच के बाद दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नवा रायपुर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार, बिलासपुर सर्किल में एक आवासीय संपत्ति के नामांतरण का आवेदन लंबे समय तक लंबित रखा गया। जांच में पाया गया कि आवेदक तोरण साहू ने 17 मार्च 2025 को आवेदन दिया था। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद 11 नवंबर 2025 को पत्र जारी और हस्ताक्षरित भी हो गया, लेकिन उसे आवेदक तक भेजा ही नहीं गया और फाइल में ही दबाकर रखा गया। इस लापरवाही के लिए एल.पी. बंजारे (कार्यपालन अभियंता व प्रभारी संपदा अधिकारी) और पूनम बंजारे (वरिष्ठ सहायक व प्रभारी सहायक संपदा प्रबंधक ) को मुख्यालय अटैच किया गया है।

आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के मामलों में इस तरह की देरी और उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा दोषियों पर लगातार सख्त कार्रवाई होगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। वहीं, शनिवार को अवकाश के दिन ही फाइल निकालकर तोरण साहू को म्यूटेशन दस्तावेज की प्रति सौंप दी गई।

मामले की पृष्ठभूमि में यह था कि हाउसिंग बोर्ड में पदस्थ महिला  सहायक प्रबंधक पूनम बंजारे महिला ने आवेदक तोरण साहू के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में मानसिक प्रताड़ना, धमकी, शासकीय कार्य में बाधा और सोशल मीडिया पर मानहानि जैसे आरोप लगाए गए हैं।

महिला अधिकारी के अनुसार, 17 अप्रैल को दोपहर करीब 1 बजे वह व्यक्ति बिना अनुमति उनके कक्ष में घुसा और फाइल से जुड़े मामले में दबाव बनाने लगा। आरोप है कि उसने टेबल पर बादाम फेंकते हुए कहा इसे खाइए, याददाश्त बढ़ेगी। वायरल वीडियो में संबंधित व्यक्ति यह कहते हुए दिखाई देता है कि उसकी फाइल एक साल से लंबित है और बार-बार टालमटोल किया जा रहा है। उसने यह भी आरोप लगाया कि फाइल जानबूझकर रोकी गई। बाद में यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया, जिसमें अधिकारी पर रिश्वत मांगने के आरोप भी लगाए गए। महिला अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और मानहानिकारक बताया । दूसरी ओर, विभागीय जांच में फाइल लंबित रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर ही तय होने के बाद कार्रवाई की गई।  


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