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दुष्कर्म मामले में उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट ने अपील खारिज की
20-Apr-2026 1:55 PM
दुष्कर्म मामले में उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

डीएनए व एफएसएल रिपोर्ट को पर्याप्त आधार नहीं माना, पीड़िता की गवाही पर भरोसा
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर 20 अप्रैल ।  हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दुष्कर्म के एक मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को विधिसम्मत बताते हुए सजा को यथावत रखा।
पीठ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों, ट्रायल कोर्ट के निर्णय और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। न्यायालय के अनुसार, सजा में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या खामी नहीं है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद प्रतीत होती है, तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, भले ही हर पहलू का स्वतंत्र पुष्टिकरण उपलब्ध न हो। छोटे-मोटे विरोधाभासों के आधार पर अभियोजन के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। यदि आवश्यक हो, तो सहायक साक्ष्य के जरिए गवाही को पुष्ट किया जा सकता है।
डीएनए रिपोर्ट नकारात्मक आने और एफएसएल जांच में वीर्य, शुक्राणु नहीं मिलने के बावजूद सजा दिए जाने का तर्क अपराधी की ओर से दिया गया था, मगर अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्ट केवल एक राय होती है। यह प्रत्यक्ष साक्ष्य, विशेषकर पीड़िता और चश्मदीद गवाहों की विश्वसनीय गवाही को निष्प्रभावी नहीं कर सकती। इस आधार पर आरोपी को लाभ नहीं दिया जा सकता।
पीठ ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में अदालतों की जिम्मेदारी अधिक होती है और ऐसे मामलों की सुनवाई संवेदनशीलता के साथ की जानी चाहिए। साक्ष्यों का मूल्यांकन व्यापक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक है।
उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए हाईकोर्ट ने अपील निरस्त कर दी और आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा पूरी अवधि तक भुगतने का निर्देश दिया।
 


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