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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 20 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के पिता की हत्या मामले में आरोपी बेटे की सजा में बड़ी राहत दी। कोर्ट ने माना कि यह घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं, बल्कि अचानक विवाद और गुस्से में हुई थी, इसलिए इसे हत्या की धारा 302 के बजाय गैर-इरादतन हत्या की धारा 304 भाग-1 में सजा होगी।
साल 2020 में रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के हरिहरपुर गांव में एक पारिवारिक विवाद ने भयावह रूप ले लिया।
लकड़ी रखने को लेकर हुए झगड़े के दौरान आरोपी महात्मा यादव ने गुस्से में अपने ही पिता जंगली यादव को पिकअप वाहन से कुचल दिया।
घटना में पिता गंभीर रूप से घायल हुआ। करीब 9 दिन तक इलाज चलने के बाद में उसकी मौत हो गई।
विचारण अदालत ने इसे हत्या मानते हुए आरोपी को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने की।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। विवाद अचानक हुआ और आरोपी ने आवेश में कृत्य किया। हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाला कि मौत गंभीर चोट और ब्रेन इंजरी से हुई। आरोपी को यह ज्ञान था कि कृत्य घातक हो सकता है, लेकिन हत्या की मंशा स्पष्ट नहीं थी।
इस आधार पर कोर्ट ने धारा 302 को बदलकर धारा 304 (भाग-1) लागू किया। अदालत ने उम्रकैद की सजा समाप्त कर अब 10 साल का कठोर कारावास की सजा दी है।


