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धान खरीदी : विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव नामंजूर, हंगामा, निलंबित भी
26-Feb-2026 4:54 PM
धान खरीदी : विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव नामंजूर, हंगामा, निलंबित भी

सत्ता पक्ष ने कांग्रेस सदस्यों पर लगाए आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 26 फरवरी। किसानों की धान खरीदी में अव्यवस्था, और प्रताडऩा के मामले पर गुरुवार को विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस सदस्यों ने काम रोको प्रस्ताव लाकर तुरंत चर्चा कराने की मांग की। प्रस्ताव अग्राह्य करने पर विपक्षी कांग्रेस सदस्य गर्भगृह में चले गए, और नेता प्रतिपक्ष समेत सभी कांग्रेस विधायक निलंबित हो गए। पांच मिनट बाद उनका निलंबन वापस भी हो गया।

प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने आरोप लगाया कि इस बार धान खरीदी में जानबूझकर अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय किसान हुए हैं, जिनका धान नहीं खरीदा गया। घरों में घुसकर भौतिक सत्यापन किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को शुरू से ही संदेह की नजर से देखा। ‘इस बार किसान खून के आंसू रो रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने में भी इतनी तकलीफ नहीं हुई थी।’ उन्होंने कहा और स्थगन स्वीकार कर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।

विधायक उमेश पटेल ने भी किसानों के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए चर्चा की जरूरत बताई। विधायक संगीता ने कहा कि पहली बार रकबा समर्पण जैसी स्थिति सामने आई है। छोटे ही नहीं, बड़े किसान भी प्रभावित हुए हैं और कई किसानों पर एक लाख रुपए से अधिक का कर्ज है।

 

एक अन्य विधायक ने आरोप लगाया कि उनके जिले में 1 लाख 60 हजार क्विंटल कम धान खरीदी हुई है। उन्होंने दावा किया कि एक किसान ने आत्महत्या की कोशिश की, जिसके बाद उसका धान खरीदा गया। इस पर तत्काल चर्चा की मांग की गई।

विधायक द्वारकाधीश यादव ने कहा कि यदि धान खरीदी नहीं हो रही है तो किसानों का कर्ज माफ किया जाए। विधायक राम कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, लेकिन यदि किसान को पुलिसिया व्यवहार झेलना पड़े तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विधायक विक्रम मांडवी ने कहा कि प्रदेश की पहचान खेती-किसानी से है और दो लाख से अधिक किसान एक लाख क्विंटल से ज्यादा धान नहीं बेच पाए हैं, इसलिए काम रोककर चर्चा कराई जानी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार पहले से ही चर्चा नहीं करने का मन बना चुकी है। उन्होंने कहा कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और किसानों का अपमान हो रहा है। ‘मेरे भी खलिहान में प्रवेश किया गया। पहले ही तय कर लिया गया कि चर्चा नहीं होगी।’ उन्होंने कहा और ग्राह्यता पर चर्चा की मांग की।

मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच सभापति ने स्पष्ट किया कि यह बजट सत्र है और बजट सत्र के दौरान स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थगन प्रस्ताव को अपने कक्ष में अग्राह्य कर दिया गया है।

स्थगन प्रस्ताव निरस्त होते ही पूरा विपक्ष सदन के भीतर गर्भगृह में पहुंच गया और नारेबाजी करने लगा, जिससे सदन का माहौल कुछ देर तक गरमाया रहा।

 


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