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माटी, बोली व लोक संस्कृति के सशक्त प्रहरी थे पं. श्यामलाल- साव
21-Feb-2026 11:34 AM
माटी, बोली व लोक संस्कृति के सशक्त प्रहरी थे पं. श्यामलाल- साव

जन्मशती पर हुए आयोजित समारोह में शामिल हुए उपमुख्यमंत्री

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 21 फरवरी। लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में शुक्रवार को पद्मश्री से सम्मानित पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की जन्मशती समारोह पर कार्यक्रम रखा गया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि 2 अप्रैल 2018 को मिला पद्मश्री सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान का सम्मान था।

इस अवसर पर साव ने पं. श्यामलाल चतुर्वेदी पर आधारित स्मृति ग्रंथ का विमोचन भी किया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पं. श्यामलाल चतुर्वेदी साहित्य, पत्रकारिता और छत्तीसगढ़ी भाषा के सशक्त प्रहरी थे। उनका व्यक्तित्व बेहद सरल, मिलनसार और जीवंत था। एक छोटे से गांव से अपनी लेखनी की शुरुआत कर उन्होंने अथक परिश्रम और मां की प्रेरणा से साहित्य जगत में ऊंचा मुकाम हासिल किया। वे छत्तीसगढ़ की माटी, बोली और लोकसंस्कृति के आजीवन साधक रहे। राज्य गठन के बाद वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पहले अध्यक्ष बने और छत्तीसगढ़ी भाषा को पहचान दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को नई पहचान दिलाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

पूर्व राजभाषा आयोग अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने कहा कि पं. श्यामलाल की मौलिक रचनाएं “गुरतुर गोठ” के नाम से जानी जाती हैं। उनकी भाषा में लोकजीवन और लोककला की आत्मा बसती थी।

वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने उन्हें छत्तीसगढ़ का सजीव प्रतीक बताते हुए कहा कि वे राज्य की विविधता और संवेदना को अपने भीतर समेटे हुए थे।

समारोह में विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, महापौर पूजा विधानी, वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति मुखर्जी, डॉ. विश्वेश ठाकरे सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के पुत्र सूर्यकांत चतुर्वेदी और परिवारजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

सभी ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


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