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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 19 फरवरी। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों ने एक शिक्षक की याचिका पर सुनवाई करते हुए वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप को अनिवार्य रूप से लागू करने और इसकी वजह से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
कोर्ट के इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता शिक्षक को अभी ऐप इंस्टॉल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा और न ही उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वीएसके ऐप को अनिवार्य बनाने को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी तीसरे पक्ष के ऐप को जबरन शिक्षकों पर नहीं थोप सकती।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि निजी मोबाइल फोन शिक्षकों की व्यक्तिगत संपत्ति है, जिसे सरकारी काम के लिए जबरदस्ती उपयोग में लाने का अधिकार प्रशासन को नहीं है। साथ ही इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ में हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई तक राज्य सरकार याचिकाकर्ता शिक्षक को ऐप लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगी।


