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बाघिन के खौफ से ग्रामीणों का तालाब जाना छूटा, बच्चे घरों में कैद
19-Feb-2026 11:27 AM
बाघिन के खौफ से ग्रामीणों का तालाब जाना छूटा, बच्चे घरों में कैद

तालाब पर फिर दिखे नए पदचिह्न, दहाड़ भी सुनी गई

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 19 फरवरी। अचानकमार टाइगर रिजर्व से लगे करखा गांव और उसके पास के बैगापारा में इन दिनों डर का माहौल है। माखुरहा तालाब के पास बाघिन और उसके शावकों के पदचिह्न मिलने के बाद ग्रामीणों ने उस दिशा में जाना लगभग बंद कर दिया है। बच्चों को घर से बाहर निकलने तक की मनाही कर दी गई है।

पिछले हफ्ते गांव के कुछ युवकों ने दावा किया कि उन्होंने माखुरहा तालाब पर बाघिन और उसके बच्चों को पानी पीते देखा। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गीली मिट्टी में साफ पदचिह्न भी मिले, जिससे इलाके में हलचल मच गई।

सोमवार को फिर नए पदचिह्न दिखाई दिए, जो पहले वाले निशानों से अलग बताए जा रहे हैं। इससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

इलाके में लगाए गए ट्रैप कैमरे में भी एक बाघ की तस्वीर कैद हुई है, जिसे बाघिन और शावकों से अलग बताया जा रहा है। नेवसा के ग्रामीणों ने कहा कि हमने बाघ को सीधे नहीं देखा, लेकिन रात में उसकी दहाड़ सुनाई दे रही है। डर के कारण अब कोई तालाब की ओर नहीं जा रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा चिंता बच्चों को लेकर है। खेत और जंगल की ओर जाने पर रोक लगा दी गई है। महिलाएं भी समूह में ही बाहर निकल रही हैं। गांव में शाम होते ही सन्नाटा छा जाता है।

टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए करखा और आसपास के क्षेत्र में दो वॉच कैंप स्थापित किए हैं। टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स और फायर वॉचर्स की दो शिफ्टों में तैनाती की गई है।

वन विभाग का कहना है कि फिलहाल बाघ के पहाड़ी की ओर बढ़ने की सूचना है, लेकिन एहतियात के तौर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

वन अमले ने ग्रामीणों से अकेले जंगल या तालाब की ओर न जाने की अपील की है। किसी भी हलचल की जानकारी तुरंत देने को कहा गया है।

अचानकमार से लगे गांवों में पहले भी वन्यजीवों की आवाजाही होती रही है, लेकिन इस बार बाघिन और शावकों की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।


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