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बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 12 फरवरी। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (पीएचई) में कार्यरत 66 उप अभियंताओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी नियुक्ति निरस्त करने संबंधी बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।
3 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगल पीठ ने 14 वर्ष पूर्व नियुक्त 67 सिविल उप अभियंताओं की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता की अंतिम तिथि (कट-ऑफ डेट) निर्धारित है, तो उसी तिथि तक डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त होना अनिवार्य है। चयन की तिथि को आधार नहीं बनाया जा सकता।
मालूम हो कि वर्ष 2011 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत 275 उप अभियंता पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। याचिका में आरोप लगाया गया कि विभाग ने विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए 275 के स्थान पर 383 नियुक्तियां कर दीं।
इनमें से 89 अभ्यर्थियों के पास 23 मार्च 2011 की निर्धारित अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। इस आधार पर नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी।
रवि तिवारी ने अधिवक्ता शाल्विक तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके विरुद्ध डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई। डिवीजन बेंच ने भी सुनवाई के बाद नियुक्तियों को अवैध ठहराया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि विभाग ने बाद में अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को अवसर देने का निर्णय लिया था। साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित कर्मचारी 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनकी सेवाएं नियमित की जा चुकी हैं।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि नियमों के विरुद्ध की गई नियुक्तियों को सहानुभूति के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की थी कि पिछले दरवाजे से हुई नियुक्तियों को उसी रास्ते लौटना होगा।
हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए प्रभावित उप अभियंताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम स्थगन दे दिया है।
अब इस मामले में अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय की विस्तृत सुनवाई के बाद होगा।


