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बिलासपुर की मतदाता सूची से 117 जीवित लोगों के नाम गायब
12-Feb-2026 12:18 PM
बिलासपुर की मतदाता सूची से 117 जीवित लोगों के नाम गायब

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया षड्यंत्र का आरोप, कलेक्ट्रेट में हंगामा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 12 फरवरी। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के एक वार्ड में 117 अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से एक झटके में हटा दिए गए। ये सभी लोग जीवित हैं, दशकों से एक ही पते पर रह रहे हैं, फिर भी किसी एक व्यक्ति ने उनके लिए सामूहिक रूप से फॉर्म-7 भरकर नाम कटवा दिए। कांग्रेस ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए कलेक्टरेट पहुंचकर हंगामा किया और जांच की मांग की।

शहर के वार्ड क्रमांक 55-56 में आने वाले बूथ 191, 192 और 193 में कुल 117 मतदाताओं के नाम विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हटा दिए गए। हैरानी की बात यह है कि ये सभी फॉर्म-7 एक ही व्यक्ति ने भरे और बीएलओ को सौंपे। बीएलओ ने बिना कोई गहन सत्यापन किए नाम हटा दिए। बाद में जब कांग्रेस नेताओं ने मौके पर जाकर पड़ताल की तो सभी 117 मतदाता अपने घरों पर मौजूद मिले। उनके पुराने दस्तावेज़, 2003 की मतदाता सूची में नाम और वर्तमान पते सब सही पाए गए।

पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा प्रत्याशी विजय केशरवानी के नेतृत्व में दर्जनों मतदाता और कांग्रेस कार्यकर्ता बुधवार को कलेक्टोरेट पहुंचे। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी-सह-कलेक्टर संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा और पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। कलेक्टर ने जांच का आश्वासन दिया है।

विजय केशरवानी ने कहा कि एक व्यक्ति 117 लोगों का फॉर्म-7 कैसे भर सकता है? बीएलओ ने बिना सत्यापन के नाम क्यों काटे? यह साफ है कि भाजपा कांग्रेस विचारधारा वाले मतदाताओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के नाम हटवाकर चुनाव को प्रभावित करना चाहती है। पूरे जिले में इसी तरह की शिकायतें आ रही हैं। जहां बीएलओ मना करते हैं, उन्हें ऊपर से धमकाया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि बीएलओ ने खुद पंचनामा बनाया है कि 116 मतदाताओं की फिजिकल वेरिफिकेशन की गई और सभी अपने पते पर मौजूद हैं। फिर भी नाम काटे गए। यह एसआईआर का दुरुपयोग है। कांग्रेस का दावा है कि कई जगहों पर भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस समर्थकों व अल्पसंख्यकों के नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 लेकर पहुंच रहे हैं। बीएलओ अगर इंकार करते हैं तो उन्हें अधिकारियों से धमकी दिलाई जा रही है कि यह काम ऊपर से आया है, नहीं माने तो कार्रवाई होगी। नतीजतन कई बीएलओ दबाव में काम कर रहे हैं।


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