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पति के खिलाफ महिला की अपील हाई कोर्ट में खारिज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 10 फरवरी। भरण-पोषण से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी बिना ठोस और वैध कारण के पति से अलग रह रही है, तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराते हुए पत्नी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
मामले के अनुसार, बिलासपुर निवासी महिला का विवाह 12 मई 2019 को महाराष्ट्र के गोंदिया निवासी युवक से हुआ था। पति सेना में इंजीनियर के पद पर कार्यरत है और उसकी मासिक आय लगभग 80 हजार रुपये बताई गई। पत्नी ने आरोप लगाया कि विवाह के कुछ समय बाद ही पति ने कार, सोने की चेन और नकद राशि की मांग को लेकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
पत्नी का यह भी कहना था कि बीमारी के दौरान उसे समुचित इलाज नहीं मिला, जिससे वह मजबूरन बिलासपुर स्थित मायके लौट आई। इसके बाद उसने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत याचिका दायर कर 25 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग की।
मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने पाया कि पत्नी अपने पति से अलग रहने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने माना कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसी आधार पर 25 नवंबर 2025 को भरण-पोषण की याचिका खारिज कर दी गई।
हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब अलगाव का कोई वैध आधार सिद्ध नहीं होता, तो भरण-पोषण का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। निचली अदालत के आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई, इसलिए हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है।


