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20 महिलाएं शामिल, हथियार व विस्फोटक सामान सौंपे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बीजापुर, 7 फरवरी। आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर आगमन के अवसर पर जिला बीजापुर में नक्सली विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति के अंतर्गत साउथ सब जोनल ब्यूरो से संबंधित 30 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादी कैडरों पर उनके संगठनात्मक पदों के अनुसार कुल 85 लाख का ईनाम घोषित था। इनमें 20 महिला एवं 10 पुरुष कैडर शामिल हैं, जिन्होंने सशस्त्र और जनविरोधी विचारधारा को त्यागकर शांति, संवाद और विकास के मार्ग को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
शनिवार को इन 30 माओवादी कैडरों ने उप पुलिस महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, अति. पुलिस अधीक्षक ऑप्स रविंद्र कुमार मीणा, अति. पुलिस अधीक्षक ऑप्स अमन कुमार झा, अति. पुलिस अधीक्षक युलैंडन यार्क, उप पुलिस अधीक्षक ऑप्स सुदीप सरकार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
इन कैडरों में कंपनी नंबर 02 एवं 07, एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम), पार्टी सदस्य, डीएकेएमएस अध्यक्ष, केएएमएस अध्यक्ष एवं जनताना सरकार अध्यक्ष जैसे पदों पर सक्रिय माओवादी शामिल थे।
आत्मसमर्पण के दौरान कैडरों द्वारा कार्डेक्स वायर - 01 बंडल, जिलेटिन स्टिक - 50 नग स्वेच्छा से सुरक्षा बलों को सुपुर्द की गई।
बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि
01 जनवरी 2024 से अब तक जिला बीजापुर में 918 माओवादी कैडर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं, 1163 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं।
232 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं। यह उपलब्धियाँ राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति, सुरक्षा बलों की सतत कार्यवाही तथा शांति, संवाद और विकास आधारित रणनीति का परिणाम हैं।

प्रत्येक कैडर को 50,000 की तात्कालिक सहायता
पुनर्वास प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक माओवादी कैडर को 50,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इनके सामाजिक पुनर्समावेशन एवं पुनर्वास हेतु आवश्यक विधिक प्रक्रिया प्रचलन में है।
सुरक्षा बलों का अहम योगदान
इस सफलता में डीआरजी, जिला बल, छसबल, एसटीएफ, कोबरा बटालियन 201, 202, 206, 210 तथा केरिपु की 85, 170, 196, 199, 218, 228 बटालियन सहित जिले में तैनात केंद्रीय बलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। निरंतर सक्रियता, विश्वास निर्माण और संवेदनशील व्यवहार से माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया गया।
अधिकारियों की अपील
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा-माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधारा को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें। शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं, पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. पट्टलिंगम ने कहा कि पूना मारगेम अभियान यह स्पष्ट करता है कि माओवादी संगठन अब अपने अंत की ओर है। हिंसा के मार्ग में केवल विनाश है, जबकि आत्मसमर्पण शांति और भविष्य का मार्ग है। हथियार छोडि़ए, मुख्यधारा में लौटिए शासन और समाज आपके साथ है।


