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मलकानगिरी ''नक्सल मुक्त'' जिला घोषित
मलकानगिरी (ओडिशा), 4 फरवरी । ओडिशा का मलकानगिरी जनपद जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, 21 लाख रुपये के इनामी मओवादी सुखराम मरकाम के पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण के बाद बुधवार को "नक्सल-मुक्त" जिला घोषित किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में नौ माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद नबरंगपुर जिले को माओवाद मुक्त घोषित किए जाने के कुछ दिनों बाद यह घोषणा की गयी है।
मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) बिनोद पाटिल एच. ने बताया कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की क्षेत्र समिति के सदस्य मरकाम ने एक एसएलआर राइफल, गोला-बारूद और अन्य सामान भी पुलिस को सौंपा।
एसपी ने पत्रकारों से कहा कि भाकपा (माओवादी) के इस सक्रिय सदस्य के आत्मसमर्पण से मलकानगिरी नक्सल-मुक्त हो गया है।
मरकाम उर्फ सुरेश उर्फ योगेश संवाददाता सम्मेलन में मौजूद था।
मलकानगिरी को कभी ओडिशा में वामपंथी उग्रवाद का गढ़ माना जाता था।
पुलिस के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया "माओवादी हिंसा मलकानगिरी में शुरू हुई और राज्य के 30 में से 21 जिलों में फैल गई। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में सक्रिय ये उग्रवादी 90 के दशक में अक्सर मलकानगिरी में शरण लेने आते थे। बाद में उन्होंने पूरे ओडिशा में अपने नेटवर्क का विस्तार किया।"
एसपी ने कहा कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हिंसा की कई घटनाओं में शामिल रहे मरकाम ने मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी ने वामपंथी चरमपंथी समूह से संबंध तोड़ लिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास व्यक्त किया।
पुलिस अधीक्षक ने कहा, "मरकाम को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत दिए जाने वाले सभी लाभ मिलेंगे।" (भाषा)


