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SIR प्रक्रिया में जाति-समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है, आयोग करे जांच
रायपुर, 4 फरवरी। छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनावी और प्रशासनिक व्यवस्था पर हमला बोला है।
प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने कहा कि यह मामला केवल कागजी अनियमितताओं का नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेदों पर सीधा हमला है।
“आज अगर वोटर लिस्ट के जरिए कमजोर वर्गों को बाहर किया गया, तो कल लोकतंत्र का चरित्र ही बदल दिया जाएगा। ” इसे “प्रशासनिक गलती नहीं, सत्ता-संरक्षित षड्यंत्र” बताते हुए कहा कि समाज के ST, SC और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है।
प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर ने कहा कि “ “फॉर्म-7 वोट काटने का हथियार बना दिया गया है। जहां नाम जोड़ने के लिए दस्तावेज़ों का पहाड़ खड़ा किया जाता है, वहीं फॉर्म-7 के जरिए नाम काटने के लिए न पहचान मांगी जा रही है, न हस्ताक्षर का भौतिक सत्यापन। उन्होंने चेतावनी दी कि यह सीधे-सीधे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लंघन है, जिसमें गलत जानकारी देने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
प्रदेश सह संगठन मंत्री समीर खान ने कहा कि “छह लोकतांत्रिक चोटें” मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में पार्टी ने जिन बिंदुओं को “लोकतंत्र पर सीधा प्रहार” बताया, वे इस प्रकार हैं—
30% मतदाताओं को अचानक नोटिस
प्रथम प्रकाशन और आपत्ति की समय-सीमा समाप्त होने के बाद “Logical Discrepancies” के नाम पर लगभग 30% मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जबकि राजनीतिक दलों को इसकी औपचारिक सूचना नहीं दी गई।
प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने कहा कि जाति-समुदाय विशेष पर केंद्रित आपत्तियां 20 जनवरी के बाद राज्यभर में ST, SC और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मतदाताओं के नामों पर संगठित तरीके से आपत्तियां दर्ज की गईं। खल्लारी और महासमुंद विधानसभा की सूची पार्टी ने प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत की।
एक व्यक्ति, दर्जनों आपत्तियां आरोप है कि एक ही व्यक्ति ने एक दिन में 5 से 30 तक आपत्तियां दर्ज कराईं, जबकि उसका संबंधित मतदान केंद्र से कोई वैध संबंध नहीं था।
रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान ने कहा कि ERO की भूमिका संदेह के घेरे में खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में ERO द्वारा आपत्तियां सीधे स्वीकार की गईं, जबकि नियमानुसार यह प्रक्रिया BLO के माध्यम से होनी चाहिए थी।
महासमुंद जिला संगठन मंत्री शकील खान ने कहा कि “लोकतंत्र बनाम साजिश”—राजनीतिक संग्राम का ऐलान इसे केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि देशव्यापी लोकतांत्रिक संकट करार दिया।
प्रतिनिधिमंडल की कड़ी मांगें
3 फरवरी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी यशवंत कुमार को सौंपे गए ज्ञापन में पार्टी ने—
उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच,
दोषी अधिकारियों पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई,
फर्जी आपत्तिकर्ताओं पर तत्काल FIR,
और फॉर्म-7 प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।


