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नयी दिल्ली, 4 फरवरी । विपक्षी सदस्यों के लगातार हंगामे के कारण बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद शाम पांच बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं मिलने और आठ विपक्षी सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब आज शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए जाने की संभावना से जुड़ी खबरों के बीच, पांच बजे सदन की बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में कुछ किताबों का जिक्र करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा और इस मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण भी सदन की कार्यवाही एक बार स्थगित करनी पड़ी।
पूर्वाह्न 11 बजे सदन की बैठक शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया। इस दौरान, विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे।
अध्यक्ष बिरला ने विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘सदन के अंदर मर्यादित आचरण और व्यवहार करना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।’’
शोर-शराबा नहीं थमने पर उन्होंने पांच मिनट बाद ही बैठक दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वक्तव्य पढ़ा।
बिरला ने इस दौरान आसन के समीप और सत्तापक्ष की पंक्तियों के सामने आकर नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा, ‘‘इस देश में अलग- अलग समय आप सरकार में रहे हैं। उसके बावजूद आप सदन की परंपराओं और मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं।’’
कांग्रेस सदस्यों के हाथों में पूर्व सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तस्वीर वाले पोस्टर थे, वहीं राहुल गांधी सदन में एक किताब हाथ में लिए हुए दिखे।
लोकसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘आप चुनकर आते हैं। सदन के अंदर और बाहर विरोध का तरीका होता है। लेकिन आप इतने वरिष्ठ नेता हैं, आपने लंबे समय तक शासन किया है। बोलने की अनुमति देना या नहीं देना नियम प्रक्रिया से निर्धारित होता है।’’
राहुल ने मंगलवार को बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के इशारे पर नेता प्रतिपक्ष को सदन में बोलने नहीं देने का आरोप लगाया था।
हंगामा नहीं थमने पर बिरला ने कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
बैठक फिर से शुरू हुई तो पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव संबंधी चर्चा शुरू कराई।
तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के सांसद जीएम हरीश बालयोगी ने विपक्ष के हंगामे के बीच ही चर्चा में भाग लिया, जिसके बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का नाम पुकारा गया।
दुबे ने कुछ किताबों का जिक्र करते हुए प्रथम प्रधानमंत्री और नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधा और उन पर भ्रष्टाचार में लिप्त रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक अप्रकाशित पुस्तक की बात कर रहे हैं, लेकिन वह गांधी-नेहरू परिवार की सच्चाई सामने लाने के लिए कई किताबें लाए हैं।
पीठासीन सभापति तेन्नेटी ने किसी पुस्तक या पत्र का उल्लेख नहीं करने संबंधी नियम का हवाला देते हुए अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देश का उल्लेख किया और दुबे को सदन में किताबें नहीं दिखाने को कहा।
उन्होंने नियम 349 का हवाला दिया जो सदस्यों को ऐसी कोई पुस्तक, अखबार या पत्र को पढ़ने से रोकता है जिसका सदन के कामकाज से लेनादेना नहीं है।
हालांकि, भाजपा सांसद किताबों को दिखाते हुए उनके लेखकों और उनमें लिखी सामग्री के बारे में टिप्पणी करते रहे।
दुबे के बयानों को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और कुछ सदस्यों को आसन के सामने कागज उछालते हुए भी देखा गया।
हंगामा बढ़ने पर पीठासीन सभापति ने कार्यवाही शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी।
पांच बजे सदन की बैठक फिर से शुरू हुई तो पीठासीन सभापति संध्या राय ने धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने के लिए भाजपा सांसद पीपी चौधरी का नाम पुकारा। हालांकि, विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच उन्होंने तत्काल बैठक को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।
विपक्ष के सांसद बैनर और पोस्टर दिखा रहे थे।
मंगलवार को सदन की अवमानना करने और महासचिव तथा लोकसभा अधिकारियों की मेजों के पास आकर कागज उछालकर आसन की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए कांग्रेस के सात और एक माकपा सांसद को संसद के वर्तमान सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। (भाषा)


