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उपभोक्ता आयोग के आदेश से हड़कंप, पुराने अधिकारियों की भूमिका देखी
रायपुर, 3 फरवरी। रविवि उप डाकघर में बचत योजना में वित्तीय घोटाले के मामले में राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के कल के फैसले से रायपुर डाक संभाग में हलचल मच गई है। इस मामले में तत्कालीन अधीक्षकों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है।
राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज गौतम चौरड़िया ने इस गड़बड़ी के लिए विभाग को45 दिनों में 1.91 करोड़ रुपए भुगतान का आदेश दिया है। इस केस में डाक विभाग की हार के बाद सी पीएमजी अजय सिंह चौहान ने मंगलवार को प्रवर डाक अधीक्षक कार्यालय गंज डाकघर परिसर में दबिश दी। श्री चौहान वहां करीब दो घंटे रहे। उन्होंने 2014-21 तक चली इस गड़बड़ी की फाइलों और पूरे केस की जांच की। उन्होंने इस घोटाले के दौरान और खुलासे के बाद सहायक डाक अधीक्षक और प्रवर अधीक्षकों की जांच में भूमिका की भी पड़ताल की। उनका कहना था कि इस गबन घोटाले में उप डाकघर के कर्मचारियों की जो भूमिका संलिप्तता रही वो तो है उस पर जांच मानिटरिंग में वरिष्ठ अधिकारियों की ढिलाई कहीं अधिक गंभीर है। उन्होंने गहराई से जांच नहीं की थी। आज इस जांच के दौरान मोजूद सूत्रों ने बताया कि सीपीएमजी ने आयोग द्वारा दिए गए रकम भुगतान के लिए अफसरों से भी रिकवरी औचित्यपूर्ण बताया। सीपीएमजी ने 2018 से 21 तक उस दौरान पदस्थ प्रवर डाक अधीक्षकों और सहायक अधीक्षक की इस मामले में सिलसिलेवार कार्यकाल में जांच की दशा दिशा की भी जानकारी ली। सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में सीपीएमजी इस मामले को लेकर डाक महानिदेशालय को रिपोर्ट भेज सकते हैं।
इससे पहले उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट रूप से माना है कि एजेंट और विभागीय कर्मचारियों, विशेषकर पोस्टमास्टर की मिलीभगत के बिना इस प्रकार का अनियमित आहरण संभव नहीं था।
आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी अनिल कुमार पाण्डेय, उनकी पत्नी एवं पुत्री द्वारा अगस्त 2016 से नवंबर 2020 के बीच रविशंकर विश्वविद्यालय उप डाकघर में डाक बचत अभिकर्ता भूपेन्द्र पाण्डेय एवं आकांक्षा पाण्डेय के माध्यम से कुल 19 टर्म डिपॉजिट रसीद (TDR) खाते और 2 आवर्ती जमा (RD) खाते खुलवाए गए थे। इन सभी खातों में जमा कुल राशि लगभग 1.97 करोड़ रुपये थी, जो परिवार की वर्षों की मेहनत और बचत का परिणाम थी। बाद में यह सामने आया कि एजेंट भूपेंद्र पांडे ने डाकघर के कुछ कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से खाताधारकों की जानकारी और अनुमति के बिना खातों से भारी रकम का आहरण कर लिया। पीड़ितों ने जब इस अनियमितता को लेकर डाक विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई, तब भी विभाग की ओर से न तो उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही संदिग्ध खातों को समय रहते होल्ड किया गया। इस लापरवाही से पीड़ितों को भारी आर्थिक और मानसिक क्षति उठानी पड़ी।
न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाया था ।


