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गगनयात्री शुभांशु शुक्ला बच्चों से बोले -मेरी यात्रा पूरे देश की अंतरिक्ष यात्रा
03-Feb-2026 7:56 PM
गगनयात्री  शुभांशु शुक्ला बच्चों से बोले -मेरी यात्रा पूरे देश की अंतरिक्ष यात्रा

छत्तीसगढ़ के बच्चों के भीतर अपार प्रतिभा, जिज्ञासा और सीखने की तीव्र इच्छा: शुक्ला

रायपुर 03 फरवरी। जिला प्रशासन के प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी के तहत ग्राम राखी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने विद्यार्थियों से संवाद किया। 

संवाद के दौरान कक्षा नवमीं की छात्रा किरण भास्कर ने चंद्रमा पर कदम रखने वाली भारत की प्रथम नागरिक बनने के अपने सपने को साझा किया। इस पर श्री शुक्ला ने छात्रा के सपने की सराहना करते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करना और सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अनुशासन और निरंतर प्रयास से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।

कॉमर्स संकाय की छात्रा काजल साहू ने पूछा कि बड़े सपने देखना क्यों जरूरी है? आपकी जर्नी में मेहनत या किस्मत और भगवान का आशीर्वाद किसका ज्यादा योगदान है? जिस पर श्री शुक्ला ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं, किस्मत बनाने के लिए मेहनत बहुत जरूरी है। आपको ज़िन्दगी मौका देती है, बस उसी मौके को अपनी सफलता में बदलने के लिए मेहनत जरूरी है। सुश्री काजल पहले प्रश्न पूछने में थोड़ा हिचकिचा रही थी श्री शुभांशु शुक्ला ने काजल से लंबी संास लेकर रिलेक्स होकर सवाल पुछने कहा साथ ही साथ ही काजल ने अपने लिखे प्रश्न को पूछने का प्रयास किया तो श्री शुक्ला ने कहा कि आप अपने मन से इच्छुक सवाल पूंछे जिससे उनके बीच बहुत सुंदर संवाद देखने को मिला।

मैकेनिकल इंजीनियर प्रीति मंडल द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़े मानसिक तैयारी के प्रश्न पर श्री शुक्ला ने कहा कि निरंतरता बनाए रखना, मानसिक रूप से मजबूत रहना और विपरीत परिस्थितियों में स्वयं को संतुलित रखना अत्यंत आवश्यक है। वहीं एस्ट्रोनॉट बनने के पहले कदम के सवाल पर उन्होंने अनुशासन को सबसे महत्वपूर्ण बताया। अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका झुकाव खेलों की ओर अधिक था, लेकिन पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बनाकर चलना जरूरी है।

श्री शुभांशु शुक्ला ने पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष बल देते हुए कहा कि पृथ्वी अत्यंत सुंदर है और टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ते हुए पर्यावरण संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं। श्री शुक्ला से बात करते समय बच्चों ने सवालों की लड़ी लगा दी। इस पर श्री शुक्ला ने फिर से उनसे सवाल लिए। इसके बाद अंत में उन्होेंने बच्चों के बीच जाकर उनसे मुलाकात की। 

अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे भारत की यात्रा थी। उन्होंने 320 परिक्रमा में लगभग 1.4 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की और प्रतीकात्मक रूप से हर भारतवासी के हिस्से का 100 मीटर सफर पूरा किया। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज भारत का बच्चा एस्ट्रोनॉट बनने का सपना देखने लगा है।

उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे से गांव या साधारण स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी एस्ट्रोनॉट बन सकता है। जैसे वे बने, वैसे ही अन्य बच्चे भी बन सकते हैं। आवश्यकता है अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने, मेहनत करने और कभी हार न मानने की।

इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि  राज्य का यह अंतरिक्ष केंद्र हजारों विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनेगा। अब अंतरिक्ष केवल कॉपियों और किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि यह वास्तविक रूप में विद्यार्थियों के सामने उपस्थित है। श्री सिंह ने बताया कि विशेष अंतरिक्ष अभियान के अंतर्गत रायपुर जिले के 300 से अधिक स्कूलों में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की जा चुकी है।


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