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सिर्फ गवाहों के हस्ताक्षर काफी नहीं, वसीयत वैध होने की शर्तें पूरी करना जरूरी
26-Dec-2025 1:29 PM
सिर्फ गवाहों के हस्ताक्षर काफी नहीं, वसीयत वैध होने की शर्तें पूरी करना जरूरी

हाईकोर्ट ने विचारण न्यायालय का फैसला पलटा
छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 26 दिसंबर। वसीयत की वैधता के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी वसीयत पर केवल गवाहों के हस्ताक्षर हो जाने मात्र से उसे भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत वैध नहीं माना जा सकता। वसीयत को कानूनी रूप से साबित करने के लिए आवश्यक शर्तों का पूरा होना जरूरी है।

जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया से जुड़े संपत्ति विवाद में निचली अदालतों और प्रथम अपीलीय अदालत के फैसलों को पलट दिया। निचली अदालतों ने वसीयत के आधार पर पोतों को संपत्ति का मालिकाना हक दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने गलत ठहराया।

मामले के अनुसार, ग्राम खम्हरिया निवासी सहेत्तर लाल का निधन 1 जनवरी 2007 को 98–99 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनके निधन के बाद दो पोतों ने दावा किया कि सहेत्तर लाल ने 21 अप्रैल 2006 को करीब 6.41 एकड़ भूमि की रजिस्टर्ड वसीयत उनके पक्ष में की थी। इस वसीयत को सहेत्तर लाल के दो बेटों श्यामलाल और चंद्रभूषण ने फर्जी बताते हुए चुनौती दी थी। हालांकि निचली अदालतों ने उनकी आपत्ति खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ बेटों ने हाईकोर्ट में द्वितीय अपील दायर की।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि वसीयत के गवाह यह साबित नहीं कर सके कि सहेत्तर लाल ने उनके सामने वसीयत पर हस्ताक्षर किए थे। गवाहों ने यह भी स्वीकार किया कि वसीयत के समय सहेत्तर लाल अत्यंत वृद्ध और शारीरिक रूप से कमजोर थे तथा बिना बताए किसी को पहचान नहीं पाते थे।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि वसीयत को साबित करने की जिम्मेदारी वादी पर होती है। इसके लिए ‘एनिमो अटेस्टेंडी’ यानी साक्ष्य देने का स्पष्ट इरादा होना आवश्यक है। कानून के अनुसार, हर गवाह ने वसीयतकर्ता को हस्ताक्षर करते हुए देखा हो और स्वयं भी उसकी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए हों। इस मामले में इन अनिवार्य कानूनी शर्तों का पालन नहीं पाया गया, इसलिए वसीयत को अवैध माना गया।

 


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