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बालोद और बालाघाट कलेक्टरों को हाईकोर्ट की नोटिस
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 26 दिसंबर। सर्पदंश से श्रमिक की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बालोद (छत्तीसगढ़) और बालाघाट (मध्यप्रदेश) के जिला कलेक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि मृतक के परिजनों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं दिया गया, जबकि घटना को लगभग 9 साल बीत चुके हैं।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के ग्राम खैरलांजी निवासी प्रशांत शिंदे वर्ष 2016 में मजदूरी के लिए छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की डोंडी लोहारा तहसील के ग्राम नहंदा आया था। 25 अक्टूबर 2016 की रात जब वह सो रहा था, तभी उसे सांप ने डस लिया। इलाज से पहले ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पत्नी सुलेखा शिंदे और परिजनों ने बालोद थाने में सर्पदंश से मौत की रिपोर्ट दर्ज कराई।
मृत्यु के बाद सुलेखा शिंदे ने बालोद और बालाघाट—दोनों जिलों के कलेक्टरों को मुआवजे के लिए आवेदन दिए। शासन के नियमों के अनुसार सर्पदंश या विषैले जीव के काटने से मृत्यु पर 4 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद करीब 9 साल बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे परिवार को गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
लगातार निराशा के बाद सुलेखा शिंदे ने अधिवक्ता अशोक पाटिल के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश पारित करते हुए दोनों जिलों के कलेक्टरों को नोटिस जारी कर मुआवजा न दिए जाने के कारणों पर जवाब मांगा है।


