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पुलिसिया जांच के तौर-तरीके पर मुस्लिम समाज नाखुश
25-Dec-2025 9:30 PM
पुलिसिया जांच के तौर-तरीके पर मुस्लिम समाज नाखुश

कल नमाज के प्रदर्शन, राज्यपाल से मिलेंगे

'छत्तीसगढ़' संवाददाता 
रायपुर, 25 दिसंबर।
 दो दिन पहले पुलिस की जांच, और कार्रवाई के तौर तरीके से मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई है। इसके खिलाफ शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद दोपहर ढाई बजे राजीव गांधी चौक पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, और राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा।

शहर सिरतुन्नबी कमेटी के सोहेल सेठी ने एक बयान में कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई ने पूरे मुस्लिम समाज को गहरी चिंता और पीड़ा में डाल दिया है। एक बड़ी कार्रवाई के नाम पर सैकड़ों मुस्लिम परिवारों के बुज़ुर्गों तथा समाज के उन प्रतिष्ठित नागरिकों को हिरासत में लिया गया, जिनकी सामाजिक छवि अब तक साफ़-सुथरी, सम्मानजनक और भरोसेमंद रही है। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन लोगों को हिरासत में लेने का ठोस और विधिसम्मत आधार क्या था।

जबकि प्रशासन का कहना है कि कुछ लोगों से पूछताछ की जानी थी। पूछताछ करना कानून-व्यवस्था का हिस्सा है और मुस्लिम समाज को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। आपत्ति पूछताछ के अधिकार पर नहीं, बल्कि उसे अपनाने के तरीक़े पर है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आधी रात महिलाओं—वह भी बुज़ुर्ग महिलाओं—और सत्तर वर्ष से अधिक आयु के बुज़ुर्गों को उनके घरों से उठाया गया, वह न केवल असंवेदनशील है, बल्कि एक सभ्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के भी विरुद्ध है। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि पूछताछ के लिए नोटिस, समन या अन्य सम्मानजनक और कानूनी प्रक्रियाएँ उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग क्यों नहीं किया गया।
सेठी ने कहा कि इस पूरी कार्रवाई से यह संदेश गया कि मुस्लिम समाज की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और समाज में भय का वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया गया। समाज के जिम्मेदार और सम्मानित नागरिकों के साथ इस प्रकार का व्यवहार होता है, तो उसका प्रभाव केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है।

उल्लेखनीय है कि करीब 120 लोगों से पूछताछ के बाद एक भी व्यक्ति दोषी नहीं पाया गया। सभी ने अपने वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसके बाद पुलिस ने सभी को रिहा कर दिया। यह तथ्य स्वयं इस कार्रवाई की गंभीरता और तरीक़े पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने आगे कहा मुस्लिम समाज कानून का सम्मान करता है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सहयोग करता आया है, लेकिन किसी भी सभ्य लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं हो सकता कि महिलाओं और बुज़ुर्गों को बिना पूर्व सूचना और बिना उचित प्रक्रिया के डराने वाले तरीक़े से हिरासत में लिया जाए।

मुस्लिम समाज इस प्रकार की कार्रवाइयों के ख़िलाफ़ संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीक़े से अपनी आवाज़ उठाएगा।

समाज की प्रमुख मांग है कि इस पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा की जाए।
जिन लोगों को बिना ठोस कारण हिरासत में लिया गया, उन्हें सम्मानपूर्वक राहत दी जाए।भविष्य में पूछताछ जैसी प्रक्रियाओं में मानवीय, संवैधानिक और कानूनी तरीक़ों का अनिवार्य पालन सुनिश्चित किया जाए।

यह आवाज़ किसी टकराव या अराजकता के लिए नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।


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