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छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला लिया, पर काउंसलिंग रुकने से जीरो ईयर का खतरा
23-Dec-2025 4:16 PM
छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का ऐतिहासिक फैसला लिया, पर काउंसलिंग रुकने से जीरो ईयर का खतरा

इधर, पीजी-एमडी काउंसलिंग जल्द कराने के लिए एनएमसी ने राज्यों को पत्र लिखा
छत्तीसगढ़' संवाददाता

रायपुर, 23 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में पीजी और एमडी पाठ्यक्रमों की मेरिट सूची जारी होने के बावजूद अब तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इसी बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 22 दिसंबर को देश के सभी राज्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि ऑल इंडिया कोटा और स्टेट कोटा  के संशोधित शेड्यूल के अनुरूप काउंसलिंग तत्काल पूरी की जाए।

एनएमसी ने स्पष्ट कहा है कि काउंसलिंग में देरी से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति बन रही है और राज्यों को तय समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा।

जानकारी के अनुसार देश के लगभग सभी राज्यों में पीजी काउंसलिंग का पहला चरण पूरा हो चुका है और कई राज्यों में दूसरे चरण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां मेरिट सूची जारी होने के बावजूद काउंसलिंग का पहला चरण भी शुरू नहीं हो पाया है।
इस देरी से आशंका जताई जा रही है कि यदि काउंसलिंग और आगे टली तो जीरो ईयर जैसी स्थिति भी बन सकती है, जिससे सैकड़ों पीजी प्रवेश इच्छुक छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।

मामले की पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का 20 नवंबर 2025 का आदेश है, जो डॉ. समृद्धि दुबे की याचिका पर पारित हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने 1 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ चिकित्सा स्नातकोत्तर प्रवेश नियम 2025 के नियम-11 में संशोधन कर दिया।
इस संशोधन के तहत राज्य कोटे की सीटों को दो बराबर हिस्सों में बांटा गया। 50 प्रतिशत संस्थागत आरक्षण और 50 प्रतिशत गैर-संस्थागत (ओपन) आरक्षण। मगर, इससे आगे बढ़कर संशोधित नियमों में यह भी कहा गया कि अब सरकारी कॉलेजों ( जिनमें एम्स शामिल है) के अलावा पहली बार निजी मेडिकल कॉलेजों को भी आरक्षण नियमों का पालन करना  होगा। शासकीय के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों पर आरक्षण लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। दोनों ही श्रेणियों में राज्य में प्रचलित एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांग, महिला आरक्षण आदि लागू होगा, जो करीब 75 प्रतिशत सीटों पर होगा। यदि दूसरे राज्य के ऐसे छात्र, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के किसी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, उन्हें ओपन सीटों पर ही आवेदन करना होगा, क्योंकि आरक्षण केवल राज्य के लोगों के लिए है। इसी के चलते नए संशोधन से दूसरे राज्यों के पीजी में प्रवेश के इच्छुक छात्र नए संशोधन के विरोध में हैं।

अधिवक्ता संदीप दुबे, जिनकी याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला दिया है, बताया है कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। वहीं हाईकोर्ट में भी संशोधित नियम-11 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया गया। दोनों अदालतों से कोई रोक नहीं होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा काउंसलिंग प्रक्रिया स्थगित रखी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि काउंसलिंग में देरी होने से सबसे बड़ा नुकसान छत्तीसगढ़ के उन एमबीबीएस उत्तीर्ण छात्रों को होगा, जिन्हें पहली बार निजी मेडिकल कॉलेजों में भी आरक्षण का लाभ मिलने जा रहा है।
करीब 900 पीजी सीटों में से लगभग 75 प्रतिशत सीटें राज्य आरक्षण के दायरे में आती हैं। यदि काउंसलिंग तय समय पर नहीं हुई, तो इन सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इधर एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लांगर द्वारा जारी पत्र में सभी राज्यों, मेडिकल कॉलेजों और छात्रों से संशोधित काउंसलिंग शेड्यूल का पालन करने को कहा गया है, ताकि ऑल इंडिया और स्टेट कोटा के बीच असंतुलन न पैदा हो।


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