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वन विभाग पर कोल ब्लॉक के लिए स्वस्थ पेड़ों को बाहरी लोगों से कटवाने का आरोप, ग्रामीणों पर एफआईआर दर्ज
छत्तीसगढ़' संवाददाता
कोरबा, 23 दिसंबर। कोरबा वनमंडल के करतला क्षेत्र में कूप कटाई को लेकर माहौल सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। इस मुद्दे पर स्थानीय आदिवासी ग्रामीण और वन विभाग आमने-सामने आ गए । चचिया, कोलगा सहित करीब 10 पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बाद उन्होंने कोरबा वनमंडल कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
ग्रामीण 10 से अधिक वाहनों में कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। पुलिस ने एहतियातन कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट बंद कर दिए। इसके बाद ग्रामीण महिलाएं जिला पंचायत के गेट से अंदर जाने लगीं, जहां पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया।
कुछ देर बाद महिलाएं जमीन पर बैठ गईं और वन विभाग की कार्यशैली के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। बाद में सीएसपी भूषण एक्का ने प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया।
स्थिति बिगड़ते देख कोरबा वनमंडल की डीएफओ प्रेमलता यादव अपने चैंबर से बाहर आईं और ग्रामीणों से बातचीत की। चर्चा के बाद इस आश्वासन पर ग्रामीण वापस लौटे कि फिलहाल कूप कटाई का कार्य रोक दिया जाएगा और आपत्तियों की जांच की जाएगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि कूप कटाई की आड़ में स्वस्थ पेड़ों को काटकर भविष्य में प्रस्तावित कोयला खदान के लिए जमीन तैयार की जा रही है। वहीं वन विभाग का कहना है कि कूप कटाई जंगल प्रबंधन की एक तकनीक है, जो वर्किंग प्लान के तहत की जा रही है। विभाग ने साफ किया कि करतला क्षेत्र में फिलहाल किसी तरह की माइनिंग का कोई आदेश या सूचना नहीं है।
मालूम हो कि कूप कटाई वन प्रबंधन की एक पुरानी तकनीक है, जिसमें पेड़ों को जमीन के पास से काटा जाता है ताकि उनसे नई शाखाएं निकल सकें। विभाग के अनुसार इससे जंगल का पुनर्जीवन होता है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि इसमें स्वस्थ पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि कूप कटाई में बाधा डालने के आरोप में कई लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो मौके पर मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने इन एफआईआर को फर्जी बताते हुए वापस लेने की मांग की है।
चचिया गांव से जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि अभिमन्यु राठिया ने कहा कि कूप कटाई की आड़ में जंगल साफ किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कटाई नहीं रुकी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन में शामि महिलाओं ने जंगल कटाई और एफआईआर को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि आदिवासी अपनी आजीविका के लिए जंगल पर निर्भर हैं और किसी भी हाल में जंगल नहीं कटने देंगे।
कलेक्ट्रेट के बाद ग्रामीण वनमंडल कार्यालय पहुंचे, जहां एसडीएम सरोज महिलांगे ने डीएफओ के साथ चर्चा कर ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी मांगों पर बैठक कर विचार किया जाएगा।


