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मौत के बाद विभागीय कार्रवाई अवैध, हाई कोर्ट ने परिवारिक पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति का रास्ता साफ किया
23-Dec-2025 11:58 AM
मौत के बाद विभागीय कार्रवाई अवैध, हाई कोर्ट ने परिवारिक पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति का रास्ता साफ किया

छत्तीसगढ़' संवाददाता 

बिलासपुर, 23 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके खिलाफ न तो विभागीय जांच चलाई जा सकती है और न ही सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया जा सकता है। कोर्ट ने मृत कर्मचारी की पत्नी और बेटे की याचिका स्वीकार करते हुए तीन माह के भीतर प्रकरण पर अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले के बाद मृत कर्मचारी की पत्नी को पेंशन और ग्रेच्युटी, जबकि बेटे को अनुकंपा नियुक्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मृत्यु के बाद जारी की गई विभागीय कार्रवाई और सेवा समाप्ति आदेश कानूनन टिकाऊ नहीं हैं।

जांजगीर-चांपा निवासी द्वारिका प्रसाद कुर्रे बिलासपुर स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 1 दिसंबर 1993 से वर्ष 2005 तक नियमित सेवा दी। इसके बाद 5 नवंबर 2005 से वे ड्यूटी से अनुपस्थित हो गए। 21 फरवरी 2011 को उन्होंने मेडिकल रूप से अनफिट होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर पुनः ड्यूटी जॉइन करने की अनुमति मांगी, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने पांच साल से अधिक की अनुपस्थिति का हवाला देकर इसे अस्वीकार कर दिया।

द्वारिका प्रसाद कुरें की 22 दिसंबर 2023 को मृत्यु हो चुकी थी। इसके बावजूद राज्य सरकार के सर्कुलर के आधार पर 20 मई 2024 को उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। एक जून 2024 को जांच रिपोर्ट आई और 3 जून 2024 को उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया।

मृतक की पत्नी सुशीला देवी और बेटे बैयाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सेवा समाप्ति आदेश को चुनौती दी। उन्होंने बैक वेज, रिटायरमेंट ड्यूज और अनुकंपा नियुक्ति की मांग की।
याचिका में दलील दी गई कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद कोई सजा या विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया गया, जिनमें कहा गया है कि मृत्यु के साथ ही विभागीय कार्रवाई स्वतः समाप्त मानी जाती है और परिवार को सभी वैधानिक लाभ दिए जाने चाहिए।

राज्य सरकार ने दलील दी कि लंबी अनुपस्थिति सेवा त्याग के समान है और विभाग को कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी नहीं थी। यह भी कहा गया कि परिवार लंबे समय तक बिना वेतन के रहा, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति का आधार नहीं बनता। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि मृत्यु के बाद की गई कार्रवाई अवैध है।

 


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