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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर/ पालक्कड़ (केरल) 21 दिसंबर। रोजगार की तलाश में केरल पहुंचे छत्तीसगढ़ के एक दलित प्रवासी मजदूर की चोरी के झूठे शक और बांग्लादेशी घुसपैठिया समझने की गलतफहमी में भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह दर्दनाक घटना केरल के पालक्कड़ जिले के वालायर थाना क्षेत्र के अट्टापल्लम गांव में 17 दिसंबर को हुई।
मृतक 31 वर्षीय रामनारायण बघेल छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के करही गांव का निवासी था। रामनारायण अपनी पत्नी ललिता, दो नाबालिग बच्चों (10 और 9 वर्षीय पुत्र) और बीमार मां के साथ गरीबी में जीवन यापन कर रहा था। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला था। 13 दिसंबर को काम की तलाश में पहली बार केरल पहुंचे रामनारायण अपने दूर के रिश्तेदार शशिकांत बघेल के साथ कंजीकोड औद्योगिक क्षेत्र में रह रहा था।
घटना के अनुसार, रामनारायण मानसिक रूप से अस्वस्थ या रास्ता भटकने की स्थिति में दिख रहा था। मंगलवार को वह अत्तापल्लम और आसपास के इलाकों में भटकते देखा गया। उन्होंने एक घर से पानी पिया, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। बुधवार दोपहर मनरेगा में काम कर रही महिलाओं के पास पहुंचकर उनके बैग में हाथ डाला, जिसमें खाना रखा था। महिलाओं के शोर मचाने पर आसपास के पुरुषों की भीड़ जुट गई। भीड़ ने उन्हें घेरकर चोरी का आरोप लगाया और बांग्लादेशी होने का शक जताते हुए पूछताछ की, जो मोबाइल पर रिकॉर्ड की गई। वीडियो में हमलावरों को रामनारायण से "क्या तुम बांग्लादेशी हो?" जैसे सवाल पूछते सुना गया।
पंचायत सदस्य शिवरामन के अनुसार, सूनसान इलाके में भीड़ ने शाम तक लाठी-डंडों से बेरहम पिटाई की। रामनारायण ने कुछ चोरी नहीं किया था, शायद भूखा था। शाम करीब 7 बजे स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। एंबुलेंस से पालक्कड़ जिला अस्पताल ले जाए जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर 80 से अधिक चोटें मिलीं, जिनमें गंभीर सिर की चोट और आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। डॉक्टरों ने कहा कि शरीर का कोई हिस्सा चोट से बचा नहीं था। उसकी और पिटाई जानवर की तरह की गई। मौत आंतरिक चोटों से रक्त हानि के कारण हुई।
पुलिस ने पांच स्थानीय लोगों - अनु (38), प्रसाद (34), मुरली (38), आनंदन (55) और बिपिन (30) को गिरफ्तार किया है। ये छोटे-मोटे काम करने वाले हैं, जिनमें से कुछ का आपराधिक इतिहास है। उन्हें भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर एन एस राजीव ने बताया कि हमले की वीडियो रिकॉर्डिंग बरामद हुई है और और लोगों की संलिप्तता की जांच चल रही है।

केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और पालक्कड़ पुलिस प्रमुख से तीन सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। प्रोग्रेसिव वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष जॉर्ज मैथ्यू ने कहा कि केरल में प्रवासी मजदूरों पर भीड़ के हमले बढ़ रहे हैं। विशेष जांच दल गठित किया जाए और शव को मुफ्त में घर भेजा जाए। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने 25 लाख रुपये मुआवजे और मामले को भीड़ हत्या के रूप में दर्ज करने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ से हर साल हज़ारों मजदूर रोजगार की तलाश में केरल जाते हैं। ज़्यादातर मज़दूर निर्माण कार्य, फैक्ट्री, होटल, प्लाईवुड, स्टील और बंदरगाह से जुड़े कामों में लगते हैं। केरल में मजदूरी अपेक्षाकृत ज्यादा होने के कारण छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार से प्रवास लगातार बढ़ा है।
लेकिन भाषा की दिक्कत, स्थानीय समाज से दूरी और अस्थायी जीवन के कारण ये मजदूर अक्सर संदेह और अफवाहों का आसान निशाना बन जाते हैं। बीते कुछ वर्षों में केरल में प्रवासी मजदूरों पर हमले, झूठे शक और भीड़ द्वारा पिटाई की घटनाएं सामने आती रही हैं।
मज़दूर संगठनों का कहना है कि कई मामलों में प्रवासी मजदूर स्थानीय भाषा नहीं जानते, अपने अधिकारों से अनजान होते हैं और किसी घटना में फंसने पर उनके पास कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं होती
यह घटना 2018 के मधु हत्याकांड की याद ताजा कराती है, जब पालक्कड़ के ही अट्टापदी में एक आदिवासी युवक को चोरी के शक में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था।
रामनारायण की पत्नी और परिजन शव लेने केरल पहुंच चुके हैं। इस समय सक्ती के करही गांव में शोक का माहौल है।


