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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 21 दिसंबर। महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक में बिला नाम का एक नाला है, जिस पर पांच साल पहले एक जलाशय का निर्माण कराया गया। हालांकि इस नाला जलाशय ने हजारों किसानों के खेतों की सिंचाई की, लेकिन इस परियोजना ने बुटीपाली गांव के 16 परिवारों से जमीन, रोजगार और पांच साल की शांति छीन ली है। नाला जलाशय के जद में आने वाली 20 एकड़ जमीन का मुआवजा एक करोड़ 77लाख रुपए आज भी किसानों को नहीं मिल पाया है। फसल और मुआवजा से वंचित अधिकतर किसान अपने परिवार पालने के लिए पलायन कर चुके हैं।
जानकारी अनुसार 16 किसानों की लगभग 20 एकड़ जमीन जलाशय के लिए अधिग्रहित कर परियोजना पूरी कर ली गई। हजारों किसानों को सिंचाई का लाभ मिल भी रहा है। लेकिन पांच साल बाद भी प्रभावित किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है।
दरअसल, किसानों की जमीन डूबान एरिया में था और सर्वे किए बगैर ही जलाशय का निर्माण शुरू कर लिया। बाद में सर्वे कर 16 किसानों का मुआवजा प्रकरण दोबारा रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया। इसी के चलते मुआवजा मिलने में देरी बताई जा रही है।
उक्त जलाशय के लिए प्रशासकीय स्वीकृति राशि 24.41 करोड़ 39 हजार रुपए थी। इसके बजाए अब तक 29.58 करोड़ 3 हजार खर्च हो चुके हैं, लेकिन किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इन 16 किसानों का 1 करोड़ 77 लाख 55 हजार रुपए मुआवजा लंबित है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर मुआवजा भुगतान नहीं हुआ तो वे चक्काजाम करेंगे।
बिला नाला जलाशय योजना का निर्माण जल संसाधन विभाग द्वारा राशि 848.21 लाख रुपए की लागत से किसड़ा भटगांव सारंगढ़-बिलाईगढ़ में किया गया था। जिसे जनवरी 2019 में पूर्ण घोषित कर दिया गया। अब तक विभाग ने कुल भू-अर्जन पर 20.8 करोड़ 36 हजार रुपए 100 से अधिक किसानों को बांटे। जलाशय निर्माण पर 9.49 करोड़ 67 हजार रुपए खर्च की गई है।
एक एकड़ में किसान 77500 का धान सालाना बेचते। इस तरह अब हर साल 16 किसानों को 20 एकड़ का 15.50 लाख रुपए, नुकसान हो रहा है। इस तरह इन किसानों को अब तक 77 लाख रुपए का नुकसान हो चुका है।
किसानों का कहना है कि पहले चरण में ग्राम किसड़ा और ग्राम बुटीमाली-हेडसपाली के किसानों के 83.85 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर 2008.36 लाख रुपए का भुगतान समय पर कर दिया गया। दूसरे चरण में बुटीपाली के 16 किसानों की 7.69 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया। लेकिन डुबान क्षेत्र का इसमें जिक्र तक नहीं किया गया।
संतोष भदौरिया, कार्यपालन अभियंता कटघोरा का कहना है कि प्रस्ताव भेजा है, राशि आने पर भुगतान होगा। डूबान एरिया होने के कारण बाद में सर्वे कर प्रकरण भेजा गया। राशि मिलते ही जल्द भुगतान कर दिया जाएगा।


