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सरकारी और निजी अस्पतालों में जेनेरिक दवाइयां अनिवार्य करने के लिए पीआईएल
05-May-2022 8:42 AM
सरकारी और निजी अस्पतालों में जेनेरिक दवाइयां अनिवार्य करने के लिए पीआईएल

हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य शासन से मांगा जवाब

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 5 मई।
 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के उस आदेश का पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई है जिसके तहत सरकारी और निजी अस्पतालों को ब्रांडेड दवाओं की जगह जेनेरिक दवाइयां लिखने को अनिवार्य किया गया है।

कोरबा के आरटीआई कार्यकर्ता लक्ष्मी चौहान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सन् 2016 में जेनेरिक दवाइयों की अनिवार्यता के संबंध में दिशानिर्देश जारी किया था। 21 अप्रैल 2017 को इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया गया, जिसके अनुसार सभी शासकीय और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को सिर्फ जेनेरिक दवाइयां लिखने का प्रावधान किया गया। निजी अस्पतालों और डॉक्टरों को भी जेनेरिक दवाइयों का प्रयोग करने के निर्देश दिए गए लेकिन राज्य के सरकारी और प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर जेनेरिक दवाओं की जगह ब्रांडेड महंगी दवाइयां मरीजों के लिए लिख रहे हैं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नोटिफिकेशन का पालन नहीं करना पेशेवर कदाचरण और शिष्टाचार नैतिकता नियम 2002 के विरुद्ध है। लिहाजा इस तरह का कदाचरण करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाए और उनका लाइसेंस निरस्त किया जाए, ताकि मेडिकल काउंसिल के दिशा निर्देशों का पालन हो सके।

याचिका में कहा गया है कि जेनेरिक दवाइयां काफी सस्ती होती हैं, जबकि ब्रांडेड दवाओं की कीमत बहुत ज्यादा है। डॉक्टरों को ब्रांडेड दवाइयां लिखने के लिए कमीशन मिलता है। यही वजह है कि जानबूझकर वे जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते।

चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 10 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।


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