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रायपुर, 4 मई । कहते हैं कि इंसानों ने जो कानून बनाए वे सभ्यता की निशानी है। जंगल राज का जिक्र हो तो उसे आदिम युग की असभ्यता कही जाती है। पर अचानकमार अभ्यारण्य की ये तस्वीरें आपकी धारणा बदल सकती हैं।
मई माह में जब जंगल में वन्यजीवों के सामने पानी का संकट गहरा चुका है वही चीतल (स्पॉटेड डीयर) सलीके से पानी पी रहे हैं। ये तस्वीर अचानकमार टाइगर रिजर्व की बफर जोन की है। शुक्र है यहां पानी शेष है और बरसात आने तक बचा भी रह सकता है ।
वन्यजीव प्रेमी वरिष्ठ पत्रकार प्राण चड्ढा कल दोपहर इस इलाके में थे। एक नर-मादा पहले यहां पहुंचे। कुछ देर बाद और भी यहां गए। पानी पीने के लिए पहले मादा और शावक मौका दिया गया और फिर बाद में सींग वाले नर चीतल, कतार में पानी पीते दिखे। कुछ मादा सहित नर चीतलों ने आकर पानी पिया।
पानी संकट सबने धैर्य बनाकर रखा और पांच -सात मिनट बाद लौट गए। उनका अनुशासन इस अवधारणा पर सवाल खड़ा कर गया कि जंगल में कोई कानून नहीं, सब जंगल का राज चलता है।

और इधर पानी की एक बूंद का हिसाब
सोशल मीडिया पर आई तस्वीर भी आपका ध्यान खींच सकती है। पेड़ के पत्ते पर पानी की बस एक बूंद है। 12 चींटियाँ पीने के लिए इक_ी हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि चीटियों ने अपने आप को चार समूहों में विभाजित कर लिया है। यह पानी की बूंद के झुकाव और फिर जमीन पर गिरने से संतुलन बनाए रखने के लिए है। पानी के हिस्से को बराबर बांटने और सबको उसका हक दिलाने में सहयोग करना इन चीटिंयों का विज्ञान है। इसे हम आप नहीं समझ पाएंगे।


