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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 29 अप्रैल। पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय की चल-अचल संपत्ति की कुर्की मामले को सरकार ने सुध ली है। बताया गया कि उच्च शिक्षा सचिव ने कलेक्टर को प्रकरण के निपटारे के लिए कार्रवाई करने कहा है। बावजूद इसके प्रकरण गंभीर हो चला है, और मई के पहले पखवाड़े में कुछ और संपत्तियों को कुर्क किया जा सकता है।
बताया गया कि भू-अर्जन के एवज में पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने पर प्रभावित किसानों ने हाईकोर्ट की तरफ रूख किया था। कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला लिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन जमीन लौटाने के पक्ष में है, लेकिन जमीन वापसी पर फैसला नहीं होने पर कुर्की की नौबत आ गई है।
हाल यह है कि कुलपति और कुलसचिव तक की गाड़ी कुर्क कर ली गई है। आने वाले दिनों में कुछ और संपत्तियों को कुर्क किया जा सकता है। उच्च शिक्षा सचिव भुवनेश यादव ने कलेक्टर सौरभ कुमार को प्रकरण पर कार्रवाई के लिए कहा था। लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने कहा है कि प्रदेश के नामी रविशंकर विश्वविद्यालय की कुर्की शर्मनाक और चिंतनीय हैं। प्रदेश में शिक्षा के मंदिर की इस प्रकार कुर्की हो रही है। वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार की गाडिय़ाँ जब्त हो रही हैं। साथ ही विश्वविद्यालय के चल-अचल संपत्ति की कुर्की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इससे प्रतीत होता है की प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
कोमल हुपेंडी ने आगे कहा कि सरकार ने वर्ष 2004-05 में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था । किसानों को जमीन का कम मुआवजा दिया गया। यह जमीन शासन ने रविवि को दी। कुछ वर्षों बाद 31 किसान जमीन का मुआवजा कम मिलने को लेकर कोर्ट चले गए। 2017 में कोर्ट से यह निर्णय दिया कि किसानों का और मुआवजा दिया जाए। किन्तु अभी तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला।मुआवजा देना प्रदेश सरकार का कार्य है उन्हे किसानों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए और रविशंकर विश्वविद्यालय को बदनाम और युवाओं के शिक्षा मंदिर का बचाव करना चाहिए।
कोमल हुपेंडी ने कहा कि जिस विश्वविद्यालय का नाम पूरे देश में प्रतिष्ठित है। सरकार के पास छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े विश्वविद्यालय के लिए 30 करोड़ खर्च करने के लिए नहीं है। यदि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन अगले कुछ दिनों में इस समस्या का हल नहीं निकालती है तो इस विश्वविद्यालय की छवि खऱाब होगी। ऐसी दिवालिया सरकार जिसका शिक्षा के प्रति ऐसा घोर अपमान जनक रवैये है, शिक्षा के प्रति उस प्रकार की लापरवाही पर सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।


