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प्रिय भगवंत मान जी ,
आपको ख़ास बधाई इसलिए कि आप उस प्रदेश के मुखिया बने हैं जिस प्रदेश के किसानों ने
साल भर तक क्रांतिकारी संघर्ष कर वो जीत हासिल की जो आज दुनिया में मिसाल है .
आपको बधाई आपने गाँव जाकर शपथ ली .
आपको बधाई आपने भगत सिंह का स्मरण किया !
क्या आपने सचमुच भगत सिंह को दिल से याद किया या ये भी आप पार्टी का
लोकपाल नियुक्त करने जैसा शिगूफा है ?
माफ़ कीजियेगा आपने शपथ पंजाब में ली पर पूरे देश में जिस तरह पहले पन्ने पर खर्चीले विज्ञापन
देकर जिस तरह भगत सिंह को याद किया, सवाल वहीं से शुरू होते हैं .
मुझे आपके किसी निजी विवादित मसलों पर कुछ नहीं कहना .
मुझे आपकी आप पार्टी पर भी कुछ नहीं कहना जिसकी शाखाएं किस शाखा से जुड़ती हैं ,सब उजागर है .
मुझे नागरिकता कानून से लेकर ,कश्मीर -धारा 370 और जहाँ कांग्रेस सत्ता में होती है वहीं आप क्यों लड़ते हैं ...ऐसे कोई सवाल आपसे नहीं करने हैं .
आप पार्टी को किरण बेदियों ,सिंहों , कपिल मिश्राओं ने अच्छे से समझा दिया कि उस आंदोलन का सच क्या है ? इसलिए ये सवाल भी आपसे नहीं पूछना !!
पर सर, मुख्यमंत्री जैसे पद पर बार बार भगत सिंह का नाम जपते हुए भगत सिंह
का सही प्रस्तुतीकरण न हो ..इस पर हमें कहना ही नहीं घनघोर आपत्ति है.
क्या आपने 'मैं नास्तिक क्यों हूँ ' पढ़ा है ? अगर पढ़ा है तो देश को बताइये कि साम्प्रदायिकता और धर्म पर भगत सिंह के विचार क्या हैं और उन पर चल कर आप कैसे खरे उतरेंगे ? अब तक तो किसी बात से पता नहीं चलता ..ख़ैर ..
सुनिए, मुझे ही नहीं भगत सिंह जिनके दिलों में हैं, हर उस हिन्दुस्तानी को इस बात पर आपत्ति है कि आपने भगत सिंह की अप्रमाणिक पीली पगड़ी वाली तस्वीर लगाकर उसे दुनिया में शाया की .
जरा इतिहास के पन्ने पलटिये इतिहास में दर्ज़ है कि भगत सिंह ने कभी पीली पगड़ी पहनी ही नहीं .
साज़िशन कभी 'इलस्ट्रेटेड वीकली ' ने ये काम किया ,कभी कुछ ऐसे लोग जो भगत सिंह को धार्मिक स्वरुप देना चाहते थे ,उन्होंने ये कोशिश की.
पर इस कड़ी में आपने बाक़ायदा अपने ऑफिस में पीली पगड़ी वाले काल्पनिक चित्र को जिस तरह प्रदर्शित किया वो स्वीकार्य नहीं है .
इस देश में भगत सिंह पर सबसे ज़्यादा काम कर चुके, सम्पूर्ण दस्तावेजों को सम्पादित कर चुके इतिहासकार प्रोफेसर चमन लाल की पुस्तकों को पढ़िए खासकर पीली पगड़ी पर बार - बार उन्होंने किस तरह बताया कि ये वास्तविक नहीं है, उन तथ्यों को समझिये .....अब आप मुख्यमंत्री हैं सर वो भी उस प्रदेश के जिस मिट्टी ने भगत सिंह को बनाया .....ज़रा गंभीर हो जाइये .
सुनिए, प्रोफेसर चमन लाल जी ने लिखा है -: ''भगत सिंह की अब तक ज्ञात चार वास्तविक तस्वीरें ही उपलब्ध हैं.पहली तस्वीर 11 साल की उम्र में घर पर सफ़ेद कपड़ों में खिंचाई गई थी. दूसरी तस्वीर तब की है जब भगत सिंह क़रीब 16 साल के थे. इस तस्वीर में लाहौर के नेशनल कॉलेज के ड्रामा ग्रुप के सदस्य के रूप में भगत सिंह सफ़ेद पगड़ी और कुर्ता-पायजामा पहने हुए दिख रहे हैं.
तीसरी तस्वीर 1927 की है, जब भगत सिंह की उम्र क़रीब 20 साल थी. तस्वीर में भगत सिंह बिना पगड़ी के खुले बालों के साथ चारपाई पर बैठे हुए हैं और सादा कपड़ों में एक पुलिस अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहा है.
चौथी और आखिरी इंग्लिश हैट वाली तस्वीर दिल्ली में ली गई है तब भगत सिंह की उम्र 22 साल से थोड़ी ही कम थी.
इनके अलावा भगत सिंह के परिवार, कोर्ट, जेल या सरकारी दस्तावेज़ों से उनकी कोई अन्य तस्वीर नहीं मिली है.''
तो मान साहब अगर आप बार बार भगत सिंह का नाम न जपते तो मैं ये खुला खत कभी न लिखता जैसे गाँधी जी की तस्वीर आपने हटाई इस मुझे आपसे कुछ नहीं कहना क्योंकि आप पार्टी का ये सच दुनिया जानती है ..पर भगत सिंह पर हम बार बार तब तक अपनी बात रखेंगे जब तक आप उनका नाम लेंगे .
.उम्मीद है आप सत्य पर और तथ्य पर ज़रूर गौर करेंगे और समझेंगे कि भगत सिंह किस तरह के क्रांतिकारी और विचारक थे .
आखिरी बात ,किसी से पूछियेगा फाँसी से ठीक पहले भगत सिंह ने कौन सी आखिरी किताब पढ़ी थी ?
[ तस्वीर -प्रोफेसर चमनलाल ]


