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8 और 5 लाख का जोड़े पर था ईनाम
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 14 मार्च। नक्सल मोर्चे में कवर्धा पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। कवर्धा के जंगल में सक्रिय एक नक्सल जोड़े ने सोमवार को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह जोड़ा नक्सल कैडर में बड़े ओहदे में था। दुर्ग रेंज आईजी ओपी पाल और एसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह के समक्ष दोनों ने समर्पण कर दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक करन और अनिता नामक दंपत्ति ने पुलिस के सामने समर्पण करते मौजूदा नक्सल संगठन के संबंध में जानकारी दी। करन 2019 में विस्तार दलम 3 में एरिया कमेटी मेम्बर के तौर पर कवर्धा के जंगल में पहुंचा था। उसी तरह उसी पत्नी अनिता भी नक्सलियों के साथ इलाके में सक्रिय थी। करन कान्हा-भोरमदेव डिवीजन कमेटी के अंतर्गत बोडला एरिया कमेटी का हार्डकोर नक्सली था। उस पर 8 लाख रुपए का ईनाम घोषित था। वहीं उसकी पत्नी पर एसीएम होने के नाते सरकार ने 5 लाख रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था। करन और अनिता दोनों मूलत: बीजापुर के रहने वाले हैं। करन 2009 में बीजापुर के गंगालूर एरिया कमेटी में बतौर सदस्य शामिल हुआ था। इसी तरह अनिता भी इसी दलम में 2016 में शामिल हुई थी। नक्सलियों के विस्तार नीति के चलते दोनों को बस्तर से कवर्धा भेजा गया था। दोनों काफी समय तक कवर्धा के बोडला क्षेत्र में सक्रिय रहे। वहीं उन पर आधा दर्जन आपराधिक मामलों में शामिल होने का पुलिस रिकार्ड भी है।
मिली जानकारी के मुताबिक करन को पिछले कुछ महीनों पहले डीवीसी पद पर पदोन्नत किया गया था। वहीं उसकी पत्नी को एसीएम बनाया गया था। दोनों ने मुख्यधारा में लौटकर नक्सलियों की अंदरूनी रवैये को साझा किया है। नक्सलियों के दोहरी नीति को लेकर दंपत्ति ने शीर्ष नक्सल नेताओं पर निशाना साधा है। इधर आईजी और एसपी ने प्रोत्साहन राशि के तौर पर दोनों को 10-10 हजार रुपए भी दिए हैं। अफसरों ने नक्सलियों से एक बार फिर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।


