ताजा खबर
रायपुर, 11 मार्च। एक सप्ताह बाद होली है। इस त्योहार में नगाड़े का एक अलग महत्व है। दो साल तक कोरोना काल की वजह से नगाड़ों की थाप सुनाई ही नहीं दी। इस साल संक्रमण घटा तो उम्मीद है जमकर बजेंगे, लेकिन नगाड़े बनाने वाले की अलग पीड़ा है। ये नगाड़े हमारे यहां मोचियों द्वारा बनाए और बेचे जाते हैं। इनका कहना है कि गांव में पशुपालन में रूचि कम होती जा रही है। इससे पशुओं की मौत के बाद हमे चमड़ा नहीं मिल पा रहा है। उस पर तुक्का यह की गौ सेवा का दावा करने वाले एक ‘दल’ के लोग परेशान अलग करते हैं। वे न तो चमड़ा उतारने देते हैं न नगाड़े बेचने देते हैं। इस वजह से इस कारोबार पर भी बड़ा असर पड़ा है। आमापारा बाजार के पास ऐसे ही एक नगाड़ा विक्रेता ने बताया कि वह डोंगरगढ़ से आया है। उसके पास 200 से लेकर 2000 तक के नगाड़े हैं। 5 दिनों बाद भी बिक्री शुरू नहीं हुई है। तस्वीर/छत्तीसगढ़


