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पश्चिम उत्तर प्रदेश में क्या जाट-मुसलमान एकता काम आई?
11-Mar-2022 9:22 AM
पश्चिम उत्तर प्रदेश में क्या जाट-मुसलमान एकता काम आई?

 

राष्ट्रीय लोकदल इस बार के चुनाव में अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब रहा है. राष्ट्रीय लोकदल ने 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे आठ सीटों पर कामयाबी मिली है.

राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी में गठबंधन था. जयंत सिंह के आरएलडी का प्रभाव जाट बहुल इलाक़े पश्चिम उत्तर प्रदेश में है और उम्मीद की जा रही थी कि किसान आंदोलन के कारण आरएलडी को अच्छी ख़ासी क़ामयाबी मिल सकती है.

आरएलडी का वोट शेयर कांग्रेस से भी ज़्यादा है. कांग्रेस का वोट शेयर 2.33% जबकि आरएलडी का वोट शेयर 2.85% है. समाजवादी पार्टी और आरएलडी गठबंधन को मुज़फ़्फ़रनगर की कुल छह सीटों में से चार पर जीत मिली है. मुज़फ़्फ़रगनर किसान आंदोलन का केंद्र रहा था.

चार में से तीन सीट पर आरएलडी को जीत मिली है. शामली में इस गठबंधन ने सभी तीन सीटें जीती हैं. वहीं बागपत की कुल तीन सीटों में एक पर ही जीत मिली है. चुनाव से पहले बीजेपी ने जयंत सिंह पर डोरे डालने की कोशिश की थी.

बागपत में सिवाल ख़ास सीट पर ग़ुलाममोहम्मद की जीत हुई है और कहा जा रहा है कि जाटों ने मुस्लिम उम्मीदवार को भी वोट किया है. लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और आरएलडी के आक्रामक चुनाव प्रचार के कारण जो बीएसपी को वोट करते थे वे बीजेपी के साथ आ गए.

आरएलडी को वैचारिक सलाह देने वाले सोमपाल शास्त्री ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू से कहा है, ''हमारे लिए यह चुनावी नतीजा निराशाजनक है. हम 20 से ज़्यादा सीटों पर जीत की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन जयंत पश्चिम उत्तर प्रदेश में एक अहम हस्ती के तौर पर उभरे हैं.''

उन्होंने कहा कि जाट-मुस्लिमों का साथ काम किया है. आरएलडी ने सत्ताधारी पार्टी के कई अहम चेहरों को हराया है. योगी सरकार में गन्ना मंत्री रहे सुरेश राणा को थाना भवन से आरएलडी के मुस्लिम उम्मीदवार असरफ़ अली ने हरा दिया.

बीजेपी के जाट चेहरे संजीव बालियान के विश्वासपात्र माने जाने वाले फायरब्रैंड विधायक उमेश मलिक को भी बुधना में हार का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा मेरठ की सरधाना सीट पर भी आरएलडी की मदद से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अतुल प्रधान ने हिन्दुत्व के मुखर चेहरा माने जाने वाले संगीत सोम को हरा दिया.भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने कहा है कि किसान आंदोलन का असर पश्चिम उत्तर प्रदेश में दिखा है लेकिन दलित वोट बीजेपी के पीछे लामबंद हो गया. (bbc.com)


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