कोण्डागांव

धान खरीदी व्यवस्था को लेकर अवैध परिवहन और खपाने आरोप
03-Feb-2026 4:22 PM
धान खरीदी व्यवस्था को लेकर अवैध परिवहन और खपाने आरोप

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोंडागांव, 3 फरवरी। कोंडागांव जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान अवैध धान परिवहन और उसके उपार्जन केंद्रों तक पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकारी समर्थन मूल्य पर हो रही धान खरीदी का लाभ किसानों के साथ-साथ गल्ला व्यापारियों और बिचौलियों को भी मिल रहा है।

सूत्रों का कहना है कि पड़ोसी राज्य ओडिशा की सीमा से जिले में धान की आवक को रोकने के लिए लगाए गए चेक पोस्टों और निगरानी व्यवस्था के बावजूद अवैध धान का प्रवेश हो रहा है। आरोप है कि इस धान को स्थानीय किसानों के नाम पर उपार्जन केंद्रों में बेचा जा रहा है।

किसानों के नाम पर धान खपाने के आरोप

सूत्रों के मुताबिक, कुछ बिचौलिए पड़ोसी राज्यों से कम कीमत पर धान खरीदकर किसानों के माध्यम से समितियों में विक्रय करा रहे हैं। इसके अलावा खुले बाजार से खरीदे गए धान को भी किसानों के नाम पर समितियों में खपाए जाने की बात कही जा रही है। सीमावर्ती गांवों और अंदरूनी मार्गों पर स्थित चेक पोस्टों पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रशासन के दावे

जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पिछले खरीफ सीजन की तरह इस बार भी सीमावर्ती क्षेत्रों में चेक पोस्ट लगाकर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों के अनुसार, बिचौलियों और अवैध धान परिवहन पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।

मंडी और समिति स्तर पर मिलीभगत के आरोप

सूत्रों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि मंडी कर्मचारियों, समिति कर्मचारियों, बिचौलियों और कुछ किसानों की मिलीभगत से पड़ोसी राज्यों का धान स्थानीय किसानों के नाम पर बेचा जा रहा है। बताया जा रहा है कि गिरदावरी व्यवस्था होने के बावजूद अवैध धान को उपार्जन प्रणाली में शामिल किया जा रहा है।

 

जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

झारा करियाकाटा क्षेत्र में अवैध धान परिवहन की शिकायत पर गठित जांच टीम की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों का आरोप है कि जांच के दौरान पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर धान को वैध बताया गया। जिस गोदाम को किराए पर लेने का दावा किया गया, उसके अस्तित्व को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि संबंधित रेंट एग्रीमेंट की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी।

इस संबंध में फूड इंस्पेक्टर मनी बघेल ने बताया कि जांच एसडीएम के निर्देश पर की गई है और रिपोर्ट मंडी सचिव को सौंपी गई है। वहीं मंडी सचिव विनोद कोडोपी ने कहा कि अवैध गोदाम और परिवहन से संबंधित जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है।

धान खरीदी व्यवस्था में सामने आ रहे इन आरोपों को लेकर अब प्रशासन द्वारा आगे की जांच और कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


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