कवर्धा

बैगा बहुल क्षेत्र में भू-स्वामित्व योजना ठंडे बस्ते में!
02-Jun-2026 6:14 PM
बैगा बहुल क्षेत्र में भू-स्वामित्व योजना ठंडे बस्ते में!

 सर्वे के बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिला भूमि अधिकार का लाभ
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बोड़ला, 2 जून।
बैगा बहुल ग्राम सरोधादादर और चिल्फी के ग्रामीण आज भी भू-स्वामित्व योजना (भू-अधिकार) के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल में गांवों में सर्वे कार्य कराया गया था,  लेकिन सरकार बदलने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया और गरीब परिवार अब भी इंतजार कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, कांग्रेस  के दौरान संबंधित विभाग द्वारा गांव में सर्वे कार्य किया गया था। कई परिवारों ने अपने दस्तावेज, जानकारी और जमीन संबंधी विवरण भी उपलब्ध कराए थे। ग्रामीणों को विश्वास था कि जल्द ही उन्हें भू-अधिकार संबंधी दस्तावेज या पट्टा मिल जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी।
इस संबंध में चिल्फी पटवारी से चर्चा करने पर जानकारी मिली कि कुछ मामलों में दावापत्ति (आपत्ति/दावा प्रक्रिया) के कारण फाइलें तहसील स्तर पर लंबित हैं। बताया गया कि इन्हीं कारणों से प्रक्रिया रुकी हुई है और अंतिम लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सका है।

वहीं चिल्फी सरपंच जागेश दास माणिकपुरी ने बताया कि लगभग सभी पात्र ग्रामीण सर्वे में शामिल थे और गांव स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से भू-अधिकार मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक परिणाम सामने नहीं आया।
बैगा बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वर्षों से जमीन पर आश्रित होकर जीवनयापन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब सर्वे पूरा हो चुका है तो फिर अधिकार पत्र मिलने में देरी क्यों हो रही है? उनका आरोप है कि प्रशासनिक सुस्ती और प्रक्रिया में अड़चनों का खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है।
 ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर लंबित प्रकरणों का निराकरण करने और पात्र हितग्राहियों को जल्द लाभ देने की मांग की है।


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