गरियाबंद

भलेरा धान खरीदी केंद्र में भ्रष्टाचार का मामला
07-Mar-2026 7:28 PM
भलेरा धान खरीदी केंद्र में भ्रष्टाचार का मामला

4 कर्मचारी बर्खास्त, एफआईआर दर्ज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नवापारा-राजिम, 7 मार्च। रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम भलेरा स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित के धान खरीदी केंद्र में बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां हजारों बोरी धान पर पाइप और मोटर पंप से पानी डालकर वजन बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी। ग्रामीणों द्वारा बनाई गई वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हडक़ंप मच गया। जांच में 10,500 बोरा धान नमीग्रस्त मिला।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने तत्काल जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद चार कर्मचारियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ  एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार खरीफ  विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान भलेरा धान उपार्जन केंद्र में रखे धान के स्टैक पर कर्मचारियों द्वारा पाइप के माध्यम से पानी डाला जा रहा था। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने मौके पर पहुंचकर इसका विरोध किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि धान को गीला कर उसका वजन बढ़ाने की साजिश रची जा रही थी, जिससे अधिक भुगतान दिखाकर अनियमित कमाई की जा सके। वहीं गीला धान जल्दी खराब होने का खतरा भी रहता है, जिससे किसानों और शासन दोनों को आर्थिक नुकसान हो सकता था।

सीसीटीवी बंद कर रची गई साजिश का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना के दौरान खरीदी केंद्र का सीसीटीवी कैमरा भी बंद कर दिया गया था, ताकि पूरी घटना रिकॉर्ड न हो सके।

कुछ ग्रामीणों का यह भी दावा है कि मामला दबाने के लिए कर्मचारियों द्वारा लगभग 10 लाख रुपये तक की रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

कलेक्टर ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सहायक आयुक्त के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। जांच दल में सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना तथा सहकारिता निरीक्षक अशोक साहू को शामिल किया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर धान के स्टैक, भंडारण व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच की तथा ग्रामीणों से भी जानकारी जुटाई।

जांच में 10,500 बोरा धान नमीग्रस्त मिला

जांच के दौरान भौतिक सत्यापन में करीब 10 हजार 500 बोरा धान नमीग्रस्त पाया गया। जांच दल ने मौके पर पंचनामा तैयार किया और अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। जांच रिपोर्ट में समिति के प्रभारी प्रबंधक विष्णु साहू, लिपिकीय सहायक उमेश कुमार साहू, प्रोसेस सर्वर इंदरमन निषाद तथा दैनिक कर्मचारी जितेंद्र कुमार साहू की लापरवाही और संलिप्तता सामने आई।

यह कृत्य छत्तीसगढ़ शासन की धान उपार्जन नीति 2025-26 के प्रावधानों के विपरीत पाया गया, जिसके बाद संबंधित चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही उप आयुक्त सहकारिता द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

किसानों का कहना है कि खरीदी के समय नमी का हवाला देकर उनसे लगभग 700 ग्राम अतिरिक्त धान लिया जाता है, लेकिन बाद में उसी धान में पानी डालना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। किसानों ने इसे उनकी मेहनत और शासन की धान खरीदी व्यवस्था के साथ धोखा बताया है।

किसानों ने किया प्रदर्शन

मामले को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला। रायपुर जिला पंचायत सदस्य यशवंत साहू और ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किसानों ने धान खरीदी केंद्र के मुख्य द्वार पर घंटों प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने सरकार और समिति प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और किसानों के हितों की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ  कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद मामला शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन किसानों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की जिम्मेदारी तय कर आगे क्या कार्रवाई होती है?


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