गरियाबंद
स्थानीय मंच पर लोक संस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 10 फरवरी। राजिम कुंभ कल्प मेला के नवमें दिन स्थानीय मंच पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली। विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत बेमेतरा की खिलेश्वरी साहू ने जसगीत पर देवी भजनों से की। इसके बाद पारागांव के सुरेश सोनकर ने जगराता भजनों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। रायपुर के अयान ने पियानो वादन कर मंच पर अलग ही रंग बिखेरा।
सिंगारभाठा के हरिराम साहू ने सतनाम भजन प्रस्तुत कर गुरु घासीदास बाबा के मनखे-मनखे एक समान का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। पोंड की साक्षी ने लोकनृत्य, गरियाबंद की गीता यादव ने सुवा नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं कुसुमबुड़ा के गिरवर सिंह ध्रुव ने लोककला मंच पर सुवा नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया।
धौराभाठा के रामकृष्ण सेन ने फाग लोककला की प्रस्तुति दी, जबकि अभिषेक वर्मा ने नाचा गम्मत में खड़े साज के साथ ऐसा समां बांधा कि दर्शक तालियां बजाने को मजबूर हो गए। बिलासपुर की विशाखा साहू ने पंडवानी की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की।
इसी क्रम में नदी मंच पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रही। नवाडीह राजिम की शांति बाई साहू ने मानसगान, बोडरा के लक्ष्मीनारायण निषाद ने सत्संग भजन, राजिम के सौर्य पटेल ने बल जसगीत, तौरेंगा के भेवन साहू ने रामायण पाठ तथा चंद्रसूर के अमरनाथ निषाद ने बालिका मानस भजन प्रस्तुत कर दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। कार्यक्रम संयोजक पुरूषोत्तम चंद्रकार एवं संचालन मनोज सेन, किशोर निर्मलकर एवं दिनेश्वर साहू ने किया।


