गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
गरियाबंद, 9 फरवरी। पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम शासकीय विद्यालय गरियाबंद में रविवार को पहला संगवारी भेंट, पूर्व छात्र-शिक्षक मिलन समारोह उत्साहपूर्ण संपन्न हुआ। प्राचार्य एवं शाला प्रबंधन विकास समिति के अध्यक्ष प्रशांत मानिकपुरी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में वर्षों पहले विद्यालय से निकले विद्यार्थियों और उनके गुरुओं का फिर से एक मंच पर मिलना यादगार क्षण रहा।
समारोह की शुरुआत वरिष्ठ शिक्षकों के सम्मान से हुई। वर्षों तक विद्यालय में सेवाएं देने वाले शिक्षकों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं दिवंगत शिक्षकों को याद करते हुए मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि के दौरान समारोह में भावुकता छा गई।
इधर, वर्षों बाद मिले पूर्व छात्र एक-दूसरे को देखकर भावुक हो उठे और गले मिलकर अपनापन जताया। विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही छात्रों की बीते दिनों की यादें ताजा हो गई। पूर्व छात्रों ने कक्षाओं, बरामदों और प्रांगण का भ्रमण किया, उन्हीं कमरों में पहुंचे जहां कभी भविष्य के सपने गढ़े गए थे। ब्लैकबोर्ड, बेंच और दीवारों को देखकर अपने स्कूली दिनों को याद किया। स्कूल समय की शरारतों, अनुशासन और मस्ती भरे पलों को साझा किया। साथ ही इन पलों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद भी किया। कहीं ठहाके गूंजे, तो कहीं आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम में शामिल गरियाबंद सहित सहित दीगर जिलों से भी छात्र पहुंचे थे।
कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक एवं संगीतमय प्रस्तुति भी दी। स्वागत भाषण में अधिवक्ता एवं समिति अध्यक्ष प्रशांत मानिकपुरी ने कहा कि यह आयोजन केवल पूर्व छात्र-शिक्षक मिलन नहीं, बल्कि उन गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता का भाव है, जिनका आशीर्वाद जीवन भर मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि इसी विद्यालय की देन है कि आज यहां से पढ़े विद्यार्थी प्रशासनिक, सामाजिक, राजनीतिक और व्यवसायिक क्षेत्रों में गरियाबंद का नाम रोशन कर रहे हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक आर.पी. मिश्रा ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि वर्षों बाद इस प्रकार का मिलन किसी सौभाग्य से कम नहीं है। सेवानिवृत्त शिक्षक भारत मोंगरे ने कहा कि इस ऐतिहासिक मिलन की अनुभूति शब्दों में बयां करना कठिन है। उन्होंने माउथ ऑर्गन की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भावनाओं से भर दिया।
कार्यक्रम में एम.एल. चंद्र, पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन सिंह मांझी, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, युगल पांडेय, रवि सोनवानी, गफ्फू मेमन, मुरलीधर सिन्हा, दिनानाथ साहू, फागुलाल कश्यप, संजय कन्नौजे, सत्येंद्र दिवाकर, प्रवीण मानिकपुरी, डॉ यूसुफ मेमन, रिखीराम यादव सहित अनेक पूर्व छात्रों ने विचार रखे। सभी ने समाज और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इसके बाद शिक्षकों के साथ बेंच पर छात्रों का फोटो सेक्शन भी हुआ। सभी छात्रों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन गिरीश शर्मा ने किया। सफल बनाने में पूरे विद्यालय परिवार, स्टाफ और स्कुली बच्चों का सहयोग रहा।
इस अवसर पर शिक्षक मदन सिंह ध्रुव, एम.एल. चंद्र, बलवंत ठाकुर, आरपी मिश्रा, केपी पटेल, कन्नौज, भरत मोगरे, परिहार, दाउ, बी.पी. देवांगन, पाल, करन चंद्राकर, फारूक अहमद, मरकाम, जूनियर साहू, गंगा सागर, आईपी साहू, सिन्हा, श्याम चंद्राकर, वंदना पांडे, रेखा शुक्ला, मृदुला तिवारी एवं देवेश सूर्यवंशी को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।


