गरियाबंद
छत्तीसगढ़ में (जीरामजी) योजना से ग्रामीण विकास की नई शुरुआत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा राजिम, 17 जनवरी। भाजपा महिला मोर्चा छत्तीसगढ़ प्रदेश सह समन्वयक माधुरी साहू ने कहा कि मेरा जन्म एक किसान परिवार में हुआ है और बचपन से मैंने ग्रामीण जीवन के संघर्ष, मेहनत और सीमित संसाधनों के बीच विकास की जद्दोजहद को बहुत नज़दीक से देखा है। मनरेगा जैसी योजनाओं के बावजूद कई स्थानों पर भ्रष्टाचार, काम में अनियमितता और मजदूरी में देरी के कारण गांवों को वह गति नहीं मिल पाई, जिसकी अपेक्षा थी। ऐसे समय में (विकसित भारत जी राम जी) योजना गांवों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
उक्त योजना का मूल उद्देश्य है गरीबी मुक्त, रोजगार युक्त, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर गांव। यह योजना केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की स्थायी संपत्तियों, कौशल विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का रोडमैप प्रस्तुत करती है।
इस योजना के अंतर्गत अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया गया है, जिससे आय में सीधा इज़ाफा होगा और पलायन पर रोक लगेगी। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है सुरक्षा और पारदर्शिता। यदि किसी कारणवश समय पर काम नहीं मिलता, तो बेरोजगारी भत्ते का स्पष्ट प्रावधान है। मजदूरी में देरी होने पर मुआवजा तय है, जिससे श्रमिकों का भरोसा व्यवस्था पर मजबूत होता है। साथ ही, सोशल ऑडिट और स्थानीय निगरानी से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है,जो कि अतीत की बड़ी चुनौती रही है। पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाना जी राम जी योजना की आत्मा है। अब योजनाएं ऊपर से थोपने के बजाय ग्राम सभा द्वारा तय होंगी। गांव की ज़रूरत चाहे सडक़ हो, तालाब, जल संरक्षण, गोदाम, सामुदायिक भवन या कृषि अवसंरचना—सबका चयन गांव खुद करेगा। इससे विकास कागज़़ से ज़मीन तक पहुंचेगा।
छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए यह योजना अत्यंत उपयोगी है। यहां के गांवों में जल संरक्षण, खेत-तालाब, मेड़-बंदी, ग्रामीण सडक़ें, गोदाम और स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयों की बड़ी आवश्यकता है।उक्त योजना के माध्यम से स्थायी संपत्तियों का निर्माण होगा, जिससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय सुदृढ़ होगी। महिलाओं और युवाओं के लिए एसएचजी के माध्यम से नेतृत्व, कौशल और स्वरोजगार के अवसर खुलेंगे—जैसे सिलाई केंद्र, शेड निर्माण, स्थानीय उद्यम।
यह योजना यह स्पष्ट संदेश देती है कि विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर जाता है। गांव को बोझ नहीं, आर्थिक शक्ति बनाना ही इसका लक्ष्य है। जब गांव मजबूत होंगे, तभी राज्य और देश मजबूत होंगे।


