दुर्ग

सीवीबी गाइडलाइन पुनरीक्षण में ‘पहले मुआवजा-फिर काम’और रेलवे में स्थायी नौकरी
14-Dec-2025 8:43 PM
सीवीबी गाइडलाइन पुनरीक्षण में ‘पहले मुआवजा-फिर काम’और रेलवे में स्थायी नौकरी

किसानों ने राज्य सरकार को भेजा मांग-पत्र

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

उतई, 14 दिसंबर। राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड (सीवीबी) गाइडलाइन 2025-2026 के पुनरीक्षण के लिए 31 दिसंबर तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने के बाद दुर्ग संभाग के कुछ किसानों ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को एक मांग-पत्र भेजा है।

मांग-पत्र में किसानों ने अनुरोध किया है कि राज्य की केंद्र और राज्य स्तरीय परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की स्थिति में ‘पहले मुआवजा, फिर कार्य’ की व्यवस्था को लागू किया जाए। किसानों का कहना है कि इससे भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा मिलने में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा।

रेलवे परियोजना से संबंधित मांगें

किसानों ने परमलकसा-नया रायपुर-खरसिया रेलवे परियोजना का उल्लेख करते हुए मांग की है कि भूमि देने वाले प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने का प्रावधान अधिसूचना में जोड़ा जाए।

किसानों ने यह भी कहा है कि जब तक नौकरी उपलब्ध न हो, तब तक मासिक अंतरिम सहायता दिए जाने की व्यवस्था की जाए।

किसान नेताओं ने कहा है कि अन्य राज्यों की कुछ रेलवे परियोजनाओं में इस प्रकार की व्यवस्थाएँ लागू हैं।

विद्युत पारेषण लाइन को लेकर मांग

132 केवी पाटन-अण्डा विद्युत पारेषण लाइन से प्रभावित किसानों ने कृषि भूमि पर होने वाले प्रभावों का उल्लेख करते हुए दोगुनी क्षतिपूर्ति दर तय करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्तमान क्षतिपूर्ति दरों में भूमि उपयोग प्रतिबंध, निर्माण सीमाएँ और उत्पादन पर पडऩे वाले प्रभावों का समुचित आकलन नहीं होता।

भूमि मूल्य निर्धारण पर सुझाव

मांग-पत्र में किसानों ने कहा है कि सीवीबी गाइडलाइन 2025-26 में भूमि मूल्य निर्धारित करते समय स्थानीय बाजार मूल्य, फसल उत्पादन क्षमता, कृषि लागत और ग्राम स्तर की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाए।

उन्होंने सिंचित, असिंचित, बाड़ी, चारागाह और आवासीय भूमि के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित करने का सुझाव दिया है।

सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन और सहमति

किसानों ने सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (एसआईए) सर्वे दोबारा कराने और इसमें किसानों, महिला समूहों, पशुपालकों तथा अन्य प्रभावित परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि परियोजना कार्य प्रारंभ करने से पहले ग्रामीणों की लिखित सहमति ली जानी चाहिए।

मांग-पत्र का प्रेषण

मांग-पत्र में अनुरोध किया गया है कि सीवीबी गाइडलाइन 2025-26 के पुनरीक्षण आदेश में इन बिंदुओं को शामिल किया जाए। यह मांग-पत्र किसान नेता ढालेश साहू की ओर से भेजा गया है।


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