दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 20 नवंबर। सिक्खों के प्रथम गुरू गुरूनानक देव की जयंती शुक्रवार को शहर में सिख समाज ने पूरे उत्साह के साथ मनाई । इस अवसर पर स्टेशन रोड स्थित गुरूद्वारा में मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। सुबह से ही गुरूग्रंथ साहेब के दर्शन के लिए सिक्ख समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों की कतारें लगी रही। वहीं अखंड पाठ की समाप्ति उपरांत हुजूरी रागी जत्था के बलविंदर सिंह, हम चाकर गोविंद के बच्चों एवं कानपुर के अमरीक सिंह कानपुरी ने भजन-कीर्तन के माध्यम से गुरूनानक देव के मानवता के संदेशों को दोहराया।
इस अवसर पर दुर्ग सांसद विजय बघेल , पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय, विधायक अरूण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल, पूर्व महापौर आरएन वर्मा, फत्तेसिंह भाटिया, पार्षद मनदीप सिंह भाटिया, अरूण सिंह, नरेश तेजवानी के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि दर्शन के लिए गुरूद्वारा पहुंचे थे। उन्होंने गुरूनानक देव से प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए कामना की और सिक्ख समाज के लोगों को गुरूनानक देव की जयंती पर बधाई दी। दोपहर में गुरूद्वारा में गुरू के अटुट लंगर का आयोजन किया गया। इसमें सिक्ख समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों ने लंगर ग्रहण कर गुरू का आशीर्वाद प्राप्त किया। लंगर में नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य कुलवंत सिंह भाटिया, राज अड़तिया, सत्येन्द्र सिंह राजपूत एवं अन्य समाजसेवी संगठनों के सदस्यों ने अपनी सेवाएं दी।
इस दौरान गुरूद्वारा गुरूसिंह सभा के प्रधान अरविंदर सिंह खुराना ने बताया कि पूरे विश्व ने कोरोना काल की त्रासदी देखी है। जिसकी वजह से पिछले दो वर्षों में गुरूनानक देव की जयंती सामुहिक रुप से नहीं मनाई गई थी। दो वर्षों बाद गुरूनानक देव जी की जयंती पर पुनरू खुशियां वापस लौटी है।
इससे सिक्ख समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों में उत्साह की लहर है। उन्होने बताया कि गुरूनानक देव का संदेश था कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। उनके संदेश के पालनार्थ गुरू के अटुट लंगर का आयोजन किया गया है।
जयंती समारोह में गुरूद्वारा गुरूसिंह सभा के प्रधान अरविंदर सिंह खुराना, महासचिव दलप्रीत सिंह भाटिया, जितेंदर सिंह, सुखदेव सिंह, प्रींस कब्बरवाल, गुरविंदर सिंह, अवतार सिंह रंधावा, सुरेन्दर सिंह कब्बरवाल, परमजीत सिंह, बनता सिंह, इस्तरी सत संघ से सतनाम कौर विरदी, अमरजीत कौर, रश्मीत कौर, परमजीत कौर, हम चाकर गोबिंद के से हरविंदर सिंह, सिमरन सिंह, मनिंदर सिंह, राजेन्दर पाल अरोरा, हरमीत सिंह भाटिया, तरसेम सिंह ढिल्लन, परमजीत सिंह भुई, महेंन्द्र सिंह खालसा, राजू भाटिया, बिट्टु अरोरा, सिंगारा सिंह, गुरदीप सिंह, देवेन्द्र सिंह, इंदरजीत सिंह भाटिया, देवेन्दर सिंह भाटिया, राजेन्दर सिंह, कुलविंदर सिंह, जसपाल सिंह एवं अन्य लोग व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।


