दुर्ग

एक्टिवा चलाकर विधायक, महापौर व कलेक्टर ने की अगुवाई
02-Sep-2021 10:10 PM
एक्टिवा चलाकर विधायक, महापौर व कलेक्टर ने की अगुवाई

पोषण रैली में दिखा उत्साह 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
दुर्ग, 2 सितंबर।
कुपोषण से लड़ाई को लेकर दुर्ग जिले के नागरिक, प्रतिनिधिगण एवं अधिकारी कितना जज्बा और संकल्प रखते हैं, यह राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत हुई पोषण रैली में दिखा। इसकी अगुवाई करने खुद विधायक अरूण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल और कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने एक्टिवा चलाई। कलेक्ट्रेट से यह रैली निकली और शहर के महत्वपूर्ण लैंडमार्क से निकलती हुई मानस भवन में पहुंची। पीछे-पीछे महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं थीं।

इस मौके पर विधायक श्री वोरा ने कहा कि बाइक रैली में जिस तरह से आप सभी का उत्साह दिखा है, उससे पता चलता है कि कुपोषण के विरुद्ध हम सब कितने संकल्पित हैं।
 महापौर धीरज बाकलीवाल ने कहा कि बच्चों के पोषण का असर उनके मानसिक शारीरिक विकास पर पड़ता है। यह सबसे प्राथमिकता का कार्य है।

 कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का क्रियान्वयन हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए डीएमएफ के माध्यम से हमने पहल की है। जनप्रतिनिधियों के सहयोग से और महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टाफ की मदद से इस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की गई है। इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे। श्री जैन ने बताया कि सभी नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में पोषण रैली निकाली गई।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से 2 फीसदी बच्चे कुपोषण के दायरे से बाहर आये
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान जिले में 2 अक्टूबर 2019 से आरंभ हुआ था, उस वक्त वजन त्योहार से जो आंकड़े आये, उनमें बच्चों के कुपोषण का प्रतिशत जिले में 15.71 था और कुपोषित बच्चों की संख्या 15413 थी। अभियान आरंभ होने के बाद अब कुपोषण का प्रतिशत 13.49 रह गया है और कुपोषित बच्चों की संख्या 12322 है। इस प्रकार इस अवधि में तीन हजार से अधिक बच्चे कुपोषण के दायरे से बाहर आये हैं।

ढाई करोड़ का किया गया व्यय
इस योजना के अंतर्गत 6 माह से 54 माह के कुपोषित बच्चों तथा एनीमिक शिशुवती माताओं को गर्म भोजनए मूंगफली, सोया, गुड़ की चिक्की प्रदान की गई। हर दिन 10217 कुपोषित बच्चों को एवं 263 एनीमिक शिशुवती माताओं को इससे लाभान्वित किया जा रहा है। इसमें लगभग 2 करोड़ 63 लाख रुपए की राशि का व्यय आ रहा है। योजना की प्रभावी मानिटरिंग के लिए हमारा सुपोषित दुर्ग सॉफ्टवेयर बनाया गया है।


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