दुर्ग

विशेषताओं से भरा है कृष्ण का जीवन-प्रभावती
31-Aug-2021 5:50 PM
विशेषताओं से भरा है कृष्ण  का जीवन-प्रभावती

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दुर्ग, 31 अगस्त। ऋषभ नगर स्थित नवकार भवन में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के तहत आज का प्रवचन जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कृष्ण के जीवन दर्शन पर केंद्रित रहा। महासती प्रभावती ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन बहुआयामी होने के साथ ही अनेक विशेषताओं से युक्त रहा है। मुख्य रूप से धर्म की रक्षा, अधर्म के विनाश के निमित्त उनका पुरुषार्थ पूज्यनीय एवं अनुकरणीय बन गया। यही वजह है वैदिक परंपरा के साथ ही जैन दर्शन में उन्हें भगवान का दर्जा प्राप्त है।

वैदिक दर्शन एवं जैन आगम में श्री कृष्ण के जन्म एवं मनुष्य रूप में उनकी लीलामय जीवन को लेकर मामूली अंतर को रेखांकित करते हुए साध्वी ने बताया चूंकि जैन दर्शन अवतारवाद को नहीं मानता इसलिए श्रीकृष्ण वासुदेव तीर्थंकर के रूप में पूजे जाते हैं, जबकि वैदिक दर्शन में उन्हें भगवान श्री हरि विष्णु का अवतार मानता है, जिनका पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए अवतरण हुआ। वासुदेव श्रीकृष्ण का जन्म किन स्थितियों व परिस्थितियों में हुआ। महाराज उग्रसेन तथा उनके पुत्र कंस के जन्म की कथा एवं जीवन आदि कथाओं की विस्तृत जानकारी महासती साध्वी ने श्रावकों को दी। 

प्राप्त में खुश रहें, अप्राप्त की इच्छा न करें
प्रारंभिक प्रवचन में आज प्रज्ञानिधि महान विदुषी श्री अभिलाषा श्रीजी ने कहा कि वस्तुत: मनुष्य यदि संतोषी स्वभाव का हो तो उसे कभी किसी वस्तु का अभाव महसूस नहीं होगा। क्योंकि अभाव का भाव व्यक्ति के स्वभाव से उत्पन्न होता है। इच्छाएं कभी पूर्ण नहीं होती स्वभावत: मनुष्य एक इच्छा पूर्ण होने के पश्चात तुरंत दूसरी व नई वस्तु की चाहत रखने लगता है। यह क्रम निरंतर जारी रहता है लेकिन यदि प्राप्त पर संतुष्ट हो जाये तो आगे की इच्छा पर विराम लग जायेगा। साथ ही वह सुखी भी हो जाएगा। साध्वी मसा ने कहा कि इच्छित वस्तु की पूर्ति नहीं होने पर व्यक्ति असंतुष्ट रहता है, फिर व्यग्रता, उग्रता, क्रोध, निराशा जैसे अस्वाभाविक भावों की गिरफ्त में व्यक्ति आ जाता है। यह सब स्वभाव के कारण होता है। ज्यादातर सांसारिक व्यक्ति अपने स्वभाव में नहीं रहते इसलिए दुख की चादर ओढ़ लेते हैं।
 


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