दुर्ग
राज्य के बाहर से आने वाले खरीददार भी नहीं पहुंच रहे, मवेशियों को खिलाने मजबूर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 25 अगस्त। इस बार खरीफ सीजन में बड़ी संख्या में किसानों ने सब्जियों का भी उत्पादन लिया है मगर किसानों को इन सब्जियों का खरीददार नहीं मिल पा रहे हैं। लौकी का खरीददार नहीं मिलने से किसान मवेशियों को खिला रहे हैं। दो रुपए किलो में भी इसे खरीदने वाले नहीं मिल रहे हैं। वहीं राज्य के बाहर से सब्जियों की खरीददारी करने जिले में आने वाले व्यापारी भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे सब्जी उत्पादक कृषकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्राम जाताघर्रा निवासी कृषक मोहन यादव ने बताया कि उन्होंने लगभग 10 एकड़ में लौकी की फसल लिया है। प्रतिदिन उनके खेतों से 3 टन लौकी निकल रहा है मगर एक-दो रुपए किलो में भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। औने पौने दाम पर भी लौकी नहीं बिकने पर फेंकना भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बाहर अन्य राज्यों से आने वाले खरीददार इस समय नहीं आ रहे हैं। अन्य राज्यों से आने वाले खरीददार सात-आठ रुपए प्रति किलो की दर से लौकी खरीद कर ले जाते थे।
उनका कहना है कि 80 फीसदी सब्जियों का उत्पादन बाहर राज्यों में जाता है। स्थानीय स्तर पर खपत कम होने की वजह से इसके खरीददार नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने 5 एकड़ में करेला का भी उत्पादन लिया है, जिसका भी उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। प्रतिकिलो 3 रुपए के हिसाब से थोक में उन्हें करेला बेचना पड़ रहा है। इसी प्रकार ग्राम के कृषक तिलक पटेल खीरा का उत्पादन ले रहे हैं मगर खीरा का भी खरीददार नहीं मिलने की वजह से एक दो रुपए किलो में बेचने मजबूर है।
बोड़ेगांव निवासी कृषक रवि प्रकाश ताम्रकार ने बताया कि उन्होंने 4 एकड़ में लौकी का फसल लिया है। रोज एक टन लौकी का उत्पादन हो रहा है मगर इसके खरीददार नहीं मिलने की वजह से वे इसे अपने मवेशियों को खिलाने मजबूर हैं। उनका कहना है कि सब्जी उत्पादक कृषकों को सही कीमत नहीं मिलने की वजह से इस बार बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राज्य बागवानी मिशन के सदस्य जालम पटेल का कहना है कि मौसम की अनुकूलता की वजह से इस बार सब्जियों का भरपूर उत्पादन सभी राज्यों में हो रहा है। जिसकी वजह से राज्य के बाहर जाने वाली सब्जी की फसलें प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि जिले के बहुत से टमाटर उत्पादक कृषकों ने भी इस बार सब्जी का उत्पादन लिया है। पहले कृषक जून एवं जुलाई में ज्यादातर टमाटर की फसल लेते थे, मगर जून-जुलाई के टमाटर की फसल में बीमारी एवं उत्पादन प्रभावित होने की वजह से इस बार बहुत से कृषकों ने पहले टमाटर की बजाय अन्य सब्जियों का उत्पादन ले रहे हैं और अब ज्यादातर किसान अगस्त-सितंबर में टमाटर की फसल लगा रहे हैं, जिसकी वजह से भी विपुल उत्पादन के कारण सब्जियों की सही कीमत किसानों को नहीं मिल पा रही है।


