दुर्ग
दुर्ग, 23 अगस्त। राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में माह अगस्त में चयनित तिथियों पर विभागों के साथ महिलाओं का कार्य स्थल लैंगिक उत्पीडऩ (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 के विषय पर वर्चुअल माध्यम से विधिक जागरूकता कार्यशाला शिविर आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी में श्रीमती मधु तिवारी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्रीमती नीरु सिंह अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्रीमती ममता भोजवानी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने विभिन्न शासकीय विभागों जैसे श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, महिला बाल विकास, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं अन्य विभागों से वर्चुअल माध्यम से अधिकारियों को उक्त अधिनियम के अंतर्गत जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि यह अधिनियम 9 दिसम्बर 2013 को प्रभाव में आया था। जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन संस्थाओं पर यह अधिनियम लागू होता है। जिस महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ हुआ है, वह शिकायत कर सकती है। यदि पीडि़त शारीरिक रूप से शिकायत करने में असमर्थ है उदाहरण के लिए यदि वह बेहोश है, तो उसके रिश्तेदार या मित्र, उसके सह-कार्यकर्ता, ऐसा कोई भी व्यक्ति जो घटना के बारे में जानता है और जिसने पीडि़त की सहमति ली है, अथवा राष्ट्रीय या राज्य स्तर के महिला आयोग के अधिकारी शिकायत कर सकते हैं।


