धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 1 दिसंबर। बीसीएस पीजी कॉलेज में 30 नवंबर को आभासी न्यायालय का आयोजन हुआ, जिसमें 2 केस पर सुनवाई हुई। पहले केस में हत्या का आरोपी दोषमुक्त हो गया, जबकि दूसरे केस में न्यायाधीश ने सबूतों के आधार पर तलाक की अनुमति दी। दोनों केस करीब 2 घंटे तक चली। इस दौरान विधि विभाग के छात्रों ने न्यायाधीश समेत आवेदक, अनावेदक की भूमिका निभाई।
पहला काल्पनिक मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103 हत्या से संबंधित था, जिसमें अभियुक्त पर आरोप था कि उससे मृतक की हत्या गला दबाकर किया है। हत्या के आरोप से बचने तथा उसे आत्महत्या साबित करने के लिए मृतक के गले में गमछा बांधकर म्यार में लटका दिया। सत्र न्यायालय ने अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के गवाहों, सबूतों तथा तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त किया। उसे तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया। प्रथम मामले में टिकेश्वर सिन्हा अभियोजन की अधिवक्ता अंकिता बंछोर, चमेली, माधुरी साहू, वर्षा साहू, दशरथ सिन्हा, सुभाष, तुमेश सिन्हा, तरूण साहू, दीपेश थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ज्योति सोनी, गीतांजली यादव, हीना यादव, मीनू कोल, तुषार देवांगन, फलेश निर्मलकर, करण, हेमचरण साहू थे। इस अवसर पर प्रोफेसर पीसी चौधरी, जिला न्यायालय के अधिवक्ता शंकर कुमार देवांगन तथा विधि भाग-3, दो तथा एक के विद्यार्थी थे।
पहले निरस्त किया, फिर तलाक की अनुमति दी
सिविल मामले के अंतर्गत हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(1) के अंतर्गत विवाह-विच्छेद (तलाक) संबंधी मामला प्रस्तुत किया गया। वादी अपने वैवाहिक जीवन से तंग आकर विवाह-विच्छेद के लिए न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था। इस मामले में आवेदिका ने कहा कि विवाह सात जन्मों का संबंध है, इसको ध्यान से रखकर न्यायालय से निवेदन है कि आवेदिका के 2 बच्चों को पिता की छत्रछाया में रखा जाए, अर्थात न्यायालय विवाह-विच्छे की याचिका निरस्त कर दें। न्यायालय ने वादी तथा आवेदिका के अधिवक्ता के तर्कों साक्ष्य, सबूतों तथा गवाहों के बयान के उपरांत विवाह-विच्छेद की याचिका पारित करते हुए विवाह-विच्छेद की अनुमति दी। मामले की भूमिका डिगेश्वरी ने निभाई। वादी के अधिवक्ता टिकेंद्र सिन्हा, अजय कुमार, आवेदिका की अधिवक्ता चित्रमाला साहू, थानेश्वर, पुखराज आदि थे। दोनों प्रकरण गवाहों, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट की भूमिका में विधि भाग-3 की विद्यार्थी थे।


