धमतरी

54 गांव के देव विग्रह पहुंचे गंगरेल
09-Nov-2024 2:48 PM
54 गांव के देव विग्रह पहुंचे गंगरेल

मां अंगार मोती के दरबार में जमीन पर लेटकर मन्नत मांगी 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 9 नवंबर।
मां अंगारमोती माता के प्रांगण में महिलाओं के ऊपर से बैगा गुजरे। गंगरेल में दिवाली के बाद पहले शुक्रवार को मड़ाई में ऐसा होता है, 52 गांव से देवी देवता पहुंचते हंै। प्रदेशभर से महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए पहुंची थी। मनोकामना पूर्ण होने के बाद इच्छा अनुसार फल चढ़ाया जाता है। सदियों से परंपरा चली आ रही है, जो देर रात देर रात तक चली।

छत्तीसगढ़ ही नहीं दूसरे प्रदेश से भी श्रद्धालु मड़ई में उपस्थित होने आए थे। नि:संतान महिला अपनी मन्नत लेकर पहुंचती है, उनके ऊपर से बैगा गुजरते हुए आगे बढ़े। हर साल दिवाली के बाद पहले शुक्रवार को। ज्यादातर महिलाओं की शादी को 3 साल हो गए, इसके बाद मां अंगारमोती माता के बारे में सुन कर गंगरेल में मन्नत के लिए सुबह 4 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक मनोकामना के खड़ी रही,और मां अंगारमोती माता के बारे जो सुना था उसी कार्य के लिए लंबी कतार में लगी रहीं।

मंदिर के मुख्य पुजारी ईश्वर नेताम ने कहा कि महिलाओं के जमीन पर लेटने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। जमीन पर ऐसी महिलाएं लेटी हैं, जिनके बरसों से बच्चे नहीं होते। उन्होंने मड़ई के दिन मां अंगार मोती के दरबार में मुख्य द्वार से मंदिर की सीढ़ी तक जमीन पर लेटकर मन्नत मांगी। मां की आस्था ऐसी कि जो भी कामना की वह पूरी हुई। 

उन्होंने बताया कि पहले जब गंगरेल बांध नहीं बना था तब ग्राम चंवर में यह मड़ई होती थी। चंवर गंगरेल में बांध में डूब गया। बांध बनने के बाद साल 1978 से मां अंगार मोती के दरबार में यह मड़ई लगता है।
 


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