धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 25 अक्टूबर। महानदी पर बने मेघा पुल के धंसकने के महिने भर बाद लोकनिर्माण एवं ब्रिज के जानकर अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया। टीम ने कुरुद-मगरलोड को जोडऩे वाले इस लाईफ लाइन में फिर से यातायात शुरू करने की संभावना टटोली। इस पार से नदिया के उस पार जाने के लिए अधिकारियों को भी 20-25 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ा।
गौरतलब है कि धमतरी जिला के कुरुद विधानसभा को दो भागों में विभाजित करने वाला महानदी पर बना तीस साल पुराना मेघा पुल 21 सितम्बर को धंसक गया था। रेत के अवैध उत्खनन में बरती गई प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ अपनी आधी उम्र में ही बेकाम हो चुके इस पुल के टूटने से रोज हजारों लोगों को नदी पार करने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
गुरुवार को पीडब्ल्यूडी ईएनसी केके पिपरी, सीई ज्ञानेश्वर कश्यप, एसी आरएस तोमर, ईई एसके नेताम, एसडीओ आरएस गंजीर, सेतु निगम के एससी मनोज थोराट, ईई विवेक शुक्ला, एसडीओ केके यादवआदि अधिकारियों ने मौके पर जाकर छतिग्रस्त पुल का निरक्षण किया। जांच टीम पहले कुरुद से गाडाडीह होते हुए मेघा पुल पर पहुंचीं। जहाँ उन्होंने पुल के उपर और नीचे से मुआयना किया।
बताया गया कि नया पुल बनाने या टुटे हिस्से का मरम्मत करने की संभावना के साथ साथ इस मार्ग में आवागमन को सुचारू करने अस्थायी मार्ग निर्माण आदि पहलुओं पर विचार विमर्श कर इसके लिए जगह और बजट आदि के संबंध में गौर किया गया। इसके बाद अधिकारी परखंदा, नारी, करेली होते हुए नदी पार कर अरौद पुल से मेघा पहुंचे। उन्होंने उस पार भी जमीनी हकीकत देख रिपोर्ट तैयार की।
यहाँ पर यह बताना लाजमी होगा कि मेघा पुल टुटने से अरौद पुल में यातायात का दबाव बढ़ गया है। जिससे उसकी भी हालत नाजुक हो रही है। सेतु निगम द्वारा उसके एप्रोच रोड का मरम्मत कराया जा रहा है।
इस बारे में लोकनिर्माण विभाग के जिलाधिकारी श्री नेताम ने बताया कि ब्रिज के विशेषज्ञ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है। जिसमें उन्होंने एप्रोच रोड निर्माण, पुल के टूटे हिस्से को फिर से बनाने, और नया हाईलेवल पुल की रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी है।


