धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 4 सितंबर। प्रशासन द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में ओबीसी सर्वे किया जा रहा है, लेकिन इसमें बीएलओ का सहयोग नहीं मिलने से कार्य में गति नहीं आ रही है। नगरीय निकाय एवं पंचायत विभाग जैसे तैसे अपने कर्मचारियों के सहारे इस काम को अंजाम देने में लगा है। समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो त्रिस्तरीय पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आरक्षण का मुद्दा लटक सकता है।
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित निर्णय के बाद राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया था। पिछले महिने छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की संबंधित आला अधिकारियों के साथ हुई बैठक में लिए गये निर्णय अनुसार अन्य पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का वार्ड एवं ग्राम वाईज आंकलन कर तत्काल सर्वे किये जाने का निर्देश जारी किया गया था। इसके लिए धमतरी कलेक्टर ने आदेश जारी कर पंचायत और नगरीय प्रशासन को सर्वे कराने की जिम्मेदारी सौंपी।
जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश था कि नगरीय निकायों के चुनाव का कार्यकाल प्रथगतया समाप्त हो रहा है, इसलिए उनके चुनाव पहले प्रारंभ होगें। अत: आगामी चुनाव के पूर्व नगरीय निकायों में मतदाता सूचीं का डोर-टू-डोर सर्वे कर उनकी संख्या का तत्काल आंकलन किया जाए। धमतरी जिला में उक्त सर्वेक्षण कार्य प्राथमिकता के आधार पर नियत समयावधि में संपन्न कराने नोडल अधिकारी/सहायक नोडल अधिकारी / समन्वयक नियुक्त किया गया है। लेकिन इस काम में अहम भूमिका अदा करने वाले बीएलओ ने सर्वे से खुद को अलग कर लिया है। जिसके चलते काम में गति नहीं आ रही है।
इस बारे में जनपद सीईओ बीआर वर्मा ने बताया कि बीएलओ के सहयोग के बिना हमने पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षकों की मदद से अब तक 15 हजार परिवार का सर्वे पूरा कर लिया है। अभी 28 हजार परिवार का सर्वे बाकी है।
नगर पंचायत कुरुद के सीएमओ महेन्द्रराज गुप्ता का कहना है कि 22 अगस्त से हमने अपने स्टाफ़ को सर्वे में लगाया था, अब तक 32 फीसदी काम हुआ है। हमें 10 अक्टूबर तक यहाँ के 2790 परिवारों तक पहुंचना है।
बीएलओ के काम नहीं करने की वजह जानने जब नोडल अधिकारी कुरुद तहसीलदार से ‘छत्तीसगढ़’ ने फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका नम्बर करीब दो घंटे से व्यस्त बताया गया। इसलिए उनसे उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।


